सोनीपत। मन में कुछ कर गुजरने का हौसला हो तो बड़ी से बड़ी बाधा भी आपके रास्ते की रुकावट नहीं बन सकती। बस आवश्यकता है दृढ़ निश्चय के साथ लक्ष्य को पाने के लिए कठोर परिश्रम करने की। ऐसा ही कर दिखाया है राई निवासी किसान रमाकांत त्यागी ने। जिन्होंने परिवार के विरोध के बावजूद मौन (मधुमक्खी) पालन शुरू किया।
30 साल पहले 200 फ्रेम से शुरू किया व्यापार आज 15 हजार फ्रेम तक पहुंच गया है। रमाकांत की यह पहल अब करोड़ों का व्यापार बन चुकी है। वह इससे दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं। आज देशभर में रमाकांत के शहद की मांग है। रमाकांत की राह पर चलकर अन्य किसान भी मौन पालन का कारोबार शुरू करने लगे हैं।
तीस साल पहले मात्र 17 हजार रुपये में मधुमक्खी का पालन शुरू करने वाले रमाकांत बताते हैं कि शुरुआत में इसे करने से परिवार के लोगों ने बहुत रोका। यही नहीं उन्हें डराया गया कि अगर मौन पालन करोगे तो कोई शादी नहीं करेगा। पिता से उनसे झगड़ा किया। उन्होंने मौन पालन को अपनी तौहीन समझी। इस न करने के लिए दबाव डाला, लेकिन मैं इरादा पक्का कर चुका था। मैंने मौन पालन शुरू किया और पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज इस काम में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के 500 किसान जुड़ चुके हैं। उससे मधुमक्खियां लेकर खुद पालन कर रहे हैं। उन्होेंने कहा कि मधुमक्खियों की देखरेख से ही कम पैसे में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।
एक छत्ते में होती हैं तीन प्रकार की मक्खी
रमाकांत बताते हैं कि एक रानी मक्खी रोज 1500 अंडे देती है। 16 दिन में रानी मक्खी, 22-22 दिन में कमेरी और ड्रोन मक्खी बनती है।
तीन दशक में पूरा किया 20 से 200 कॉलोनी तक का सफर
रमाकांत ने बताया कि सोनीपत में पानी की किल्लत और जमीन खराब होने के कारण खेती में खर्चे भी पूरे नहीं होते थे। ऐसे में उन्होंने मौन पालन शुरू करने का निर्णय लिया। परिवार के लोगों ने साथ छोड़ दिया। जिद की और आज वह हर तरीके से बेहतर जीवनयापन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि साल 1992 में 20 कॉलोनी से कारोबार शुरू किया। आज 1200 कॉलोनी उसके पास हैं। एक कॉलोनी में 10 फ्रेम (छत्ते) हैं। 4 कॉलोनी में मौसम अनुकूल करने पर तीन माह में एक टीन यानी 25 किलोग्राम शहद निकलता है।
रमाकांत की शहद की मांग देशभर में
रमाकांत शहद तैयार करने के लिए मधुमक्खियों को लेकर देहरादून के लीची बाग, उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद क्षेत्र के रामपुर जाते हैं। कलानौर में सरसों के सीजन में कारोबार बढ़ाने के लिए जाते हैं। जिससे विभिन्न किस्मों का उत्तम शहर तैयार कर रहे हैं। मधुमक्खियों से नीम, करेला, जामुन सहित कई वैरायटी का शहद तैयार कर रमाकांत दस साल से लगातार सरकार की तरफ से सम्मानित हो रहे हैं। अब तो जहां भी सेमिनार होते हैं रमाकांत को किसानों को प्रायोगिक तौर पर समझाने के लिए ले जाते हैं।
दो बेटियों की शादी में गाड़ी के साथ दिए 10-10 बॉक्स
रमाकांत ने अपनी दो बेटियों की शादी खूब धूमधाम से की। शादी में दोनों बेटियों को गाड़ी के साथ 10-10 बॉक्स (कॉलोनी) मधुमक्खी के भी दिये। रमाकांत कहते हैं कि वह आज जो कुछ भी हैं मौन पालन के कारण हैं। वह दूसरों को भी मौन पालन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।