सोनीपत। गांव हरसाना कलां के पास रेलवे ट्रैक के निकट लगी आग ने दो युवकों की जिंदगी लील ली। अक्सर आग लगाने पर प्रतिबंध के बावजूद फांस व घास फूंस में आग की घटनाएं सामने आ जाती है। जिसका खामियाजा खेतों से गुजर रही सड़क पर आवागमन करने वाले वाहन चालकों को भुगतना पड़ता है। अब रेलवे यात्रियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ गया।
घास फूस व फांस की आग को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण विभाग व कृषि विभाग जागरूकता कार्यक्रम भी चलाता रहता है, लेकिन आग लगने की घटना रुक नहीं रही हैं। इस दिशा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ ही जिला प्रशासन को भी सख्त रवैया अख्तियार करना चाहिए। जिससे प्रदूषण फैलने के साथ ही हादसों की आशंका को भी कम किया जा सके।
सोनीपत के गोहाना में वर्ष 2016 में टाटा-मैजिक गाड़ी एक बाइक से टकरा गई थी। जिसमें टाटा-मैजिक की सवारी खेत के पास लगी आग में जिंदा जल गई थी। हादसा सड़क पर फैले धुएं के कारण हुआ था। अब रेलवे में ट्रैक के किनारे लगी आग से दो युवकों को जिंदगी से हाथ धोना पड़ा।
कृषि अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुहाड़ कहते हैं कि खेतों के आसपास लगने वाली आग आने वाली पीढ़ी के लिए भी नुकसानदायक है। आग जहां खेतों में लाभकारी कीटों को नष्ट कर रही है, वहीं इससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी कमजोर हो रही है। इसके साथ ही आग से सड़क किनारे लगे पेड़ भी झुलस जाते हैं जिससे प्रदूषण में लगातार वृद्धि होती है।