टकराव बढ़ने की आशंका
इसके साथ ही यह अपील की गई है कि किसान केवल विरोध करेंगे और उस दौरान प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। किसानों की लड़ाई प्रशासन या पुलिस से नहीं है, बल्कि सरकार की व्यवस्था से लड़ाई है। किसानों की इस घोषणा के बाद से टकराव बढ़ने की आशंका है तो वहीं हरियाणा में तय की गई किसान पंचायतों को अभी निरस्त किया जा सकता है। इसका बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है कि सरकार भी किसी तरह का कोई बखेड़ा नहीं चाहती है।
हमारी प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों से कोई दुश्मनी नहीं है और इसलिए उनको कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। नेताओं को हम किसी भी जगह घुसने नहीं देंगे। अब लड़ने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। ठंड व बारिश में किसान सड़क पर बैठा हुआ है और उसके बाद भी इन नेताओं पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। सरकार देश में 700 सभाएं करने की बात कहती है और हरियाणा में झूठ फैलाने के लिए रैली का नाम किसान पंचायत रख दिया गया। जिस तरह से करनाल में हुआ है, ऐसा सभी जगह करना है। हम हाथ नहीं उठाएंगे, लेकिन किसी भी हालत में इस तरह की रैली व पंचायत भी नहीं होने देंगे। - गुरनाम सिंह चढूनी, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा
सरकार ने पहले कृषि कानून गलत बनाकर किसान की जमीन छीनने का काम किया है। अब बातचीत करने की बात कहकर जिस तरह से कानूनों के समर्थन में अभियान चलाकर भ्रम फैलाया जा रहा है, वह गलत किया जा रहा है। सरकार जिस तरह से किसान पंचायत बुलाई, उसमें किसानों पर पहले लाठीचार्ज करके माहौल खराब किया गया। इस तरह की पंचायत करना गलत है और किसान उसका विरोध जताएंगे। - अभिमन्यु कोहाड़, राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान-मजदूर महासंघ