डॉ. सोनिया दहिया।
सोनीपत। अपने लिए जिये तो क्या जिये, तू जी, ए दिल जमाने के लिए...। इस गीत के बोल दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बायोटेक की प्रोफेसर डॉ. सोनिया दहिया पर स्टीक बैठते हैं।
दरअसल, सोनिया ने कोरोना काल में महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए मशरूम की खेती शुरू की थी। आज उनके साथ जुड़कर महिलाएं न सिर्फ रोजगार पा रही हैं, बल्कि मशरूम उत्पादन का ज्ञान लेकर आत्मनिर्भर भी बन रही हैं। डॉ. सोनिया दहिया ने बताया कि कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान जो विपरीत हालात पैदा हुए थे, उससे काम धंधे ठप पड़ गए थे। मजदूर वर्ग के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। हालात ऐसे थे कि गरीब तबके के लोगों को दो वक्त की रोटी तक नसीब नहीं हो पा रही थी। ऐसे में उन्होंने कुछ ऐसा करने की सोची, जिससे जरूरतमंद महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें। डॉ. सोनिया बताती हैं उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए मशरूम की खेती करने का निर्णय लिया। इसके लिए वह ग्रामीण क्षेत्रों में गईं और जरूरतमंद महिलाओं से मिलकर उन्हें प्रेरित किया। इसके बाद डॉ. सोनिया ने मशरूम फार्म शुरू किया। बताया कि शुरुआत थोड़ी मुश्किल थी, लेकिन शिक्षक पति ने हौसला बढ़ाया और फिर सभी ने मिलकर कुछ अलग करने की दिशा में कदम बढ़ाए। इसके बाद बड़वासनी में मशरूम के दो ग्रोइंग रूम लगाकर कारोबार शुरू किया। समाजसेवा के क्षेत्र भी योगदान है।