विरासत में मिले सेवाभाव के गुण
डॉ. अनीता सिंह मूलरूप से गांव रिंढाणा की रहने वाली हैं। वह बताती हैं कि उनका परिवार शुरू से ही रोहतक में रहा है। दादा कुंजाराम व पिता किशन लाल नरवाल हमेशा लोगों की सेवा के लिए तत्पर रहते थे। वे पढ़ाई का महत्व जानते थे। जिस समय लड़कियों की पढ़ाई को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती थी, उस समय उन्होंने तीन बहनों व एक भाई को उच्चतर शिक्षा दिलवाई।
मैंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एम फिल व पीएचडी की। भाई नरेश नरवाल वर्ततान में करनाल में नगर निगम कमिश्नर हैं। अच्छे पदों पर आसीन होने के बावजूद भी जरूरतमंदों की मदद करने से कभी पीछे नहीं रहे। लोगों की सेवा करने का भाव हमें विरासत में मिला है। डॉ. सिंह कहती हैं कि जब तक सांस रहेगी, तब तक प्रकृति की सेवा करती रहेंगी।
ऐसे शुरू हुआ सेवा का सफर
डॉ. अनीता सिंह बताती हैं कि उन्होंने वर्ष 1988 में सीआरए कॉलेज मेें बतौर सहायक प्रोफेसर भूगोल ज्वाइन किया था। वर्ष 1992 में वह टीकाराम कन्या महाविद्यालय में आ गई। इसी साल अखिल भारतीय निबंध प्रतियोगिता हुई थी, जिसमें एक लड़की ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उस लड़की की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, लेकिन वह आगे पढ़ना चाहती थी। बस मन में उस लड़की के लिए कुछ करने का मन किया और उसे अपने कॉलेज में दाखिला दिलवाया।
उसकी फीस खुद वहन की। उसके बाद से जब भी किसी लड़की के बारे में पता लगता कि वह आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई से वंचित है तो उसकी मदद करती हूं। 30 सालों से यह सिलसिला बरकरार है और जीवन पर्यंत चलता रहेगा। सेवाभाव के साथ ही डॉ. अनीता सिंह के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब तक 12 शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. अनीता सिंह को 2021-22 में आध्यात्मिक उपलब्धियों के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। वहीं 28 जून को दिल्ली में आयोजित इनर व्हील क्लब के वार्षिक समारोह में 21 पुरस्कार जीते।
30 सालों से ध्यान और योग का दे रहीं प्रशिक्षण
डॉ. अनीता सिंह ने बताया कि वह साल 1992 में श्रीरामचंद मिशन के साथ जुड़ीं, जो 163 देशों में ध्यान लगाने की निशुल्क सेवा दे रहा है। यहां ध्यान लगाना सीखा और पता लगा कि ध्यान हमारे शरीर, मन व आत्मा का पोषण करता है। उसके बाद महाविद्यालय में अध्यापिकाओं व छात्राओं को ध्यान व योग कराती थी। सेवानिवृत्ति के बाद भी निशुल्क ध्यान व योग का सिलसिला जारी है।
डॉ. अनीता सिंह वर्तमान में इनरव्हील क्लब एनसीआर जोन की पर्यावरण कमेटी की को-चेयरपर्सन हैं। मानव अधिकार संरक्षण संघ, सारथी जन चेतना, जनहित फाउंडेशन, सशक्त नारी संगठन, रेडक्रॉस सोसायटी की सदस्य होने के साथ ही पर्यावरण संगठनों के साथ जुड़कर सामाजिक कार्यों में लगी रहती हैं। उनका कहना है कि जब हमें इस धरती को छोड़ना ही है तो क्यों न भावी पीढ़ी के लिए कुछ न कुछ करके जाएं।