रक्षाबंधन पर्व के उल्लास में भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने जा रही बहनों को बसों और ट्रेनों में भारी भीड़ के बीच खड़े होकर सफर करना पड़ा। हालात यह थे कि महिलाओं को खड़े होने के लिए भी मुश्किल से जगह मिल पा रही थी। रोडवेज अधिकारियों ने यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए 62 बसों को सड़कों पर उतारा। लंबे रूट की बसों के फेरे घटाकर लोकल रूटों पर चलाई गई, इसके बावजूद यात्रियों की बढ़ती संख्या के सामने बसों की कमी साफ नजर आई। विभिन्न रूटों पर यात्रियों की भीड़ रही। रोडवेज अधिकारी दिन भर व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
प्रदेश सरकार ने रक्षाबंधन पर्व को लेकर 10 अगस्त दोपहर 12 बजे से 11 अगस्त रात 12 बजे तक रोडवेज बसों में महिलाओं को मुफ्त सफर की सुविधा दी थी। मुफ्त सफर की सुविधा मिलते ही महिलाओं ने बुधवार दोपहर से ही बसों में सफर शुरू कर दिया था। वीरवार को बस अड्डे से सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक भीड़ रही। विभिन्न रूटों पर बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रोडवेज विभाग ने अपने इंस्पेक्टरों की नियुक्त की थी, ताकि व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा सके। सभी चालक-परिचालकों की छुट्टियां पहले ही रद्द कर दी गई थीं। निजी बसों के परिचालन पर नजर रखी जा रही थी। इसके बावजूद महिलाओं को भीड़ के बीच धक्का-मुक्की में सफर करने के लिए विवश होना पड़ा।
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लंबी दूरी की बसों के फेरे घटाए
रक्षाबंधन पर्व पर महिलाओं व अन्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देते हुए रोडवेज अधिकारियों ने लंबे रूट पर चलने वाली बसों के फेरे घटाकर लोकल रूटों पर चलाया। यही नहीं जिस भी रूट पर यात्रियों की संख्या अधिक होती, उसी रूट पर बस को रवाना कर दिया जाता। इस व्यवस्था के बावजूद यात्रियों को बसों की कमी का सामना करना पड़ा। इस व्यवस्था के बाद लंबे रूट पर जाने वाले यात्रियों को बस के लिए एक से डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ा। जो भी बस आती, स्टैंड पर लगने से पहले ही भर जाती थी। सीट लेने के लिए यात्री धक्का-मुक्की करते रहे।
बहादुरगढ़ रूट के यात्री रहे परेशान
रोडवेज अधिकारियों की माने तो सोनीपत से रोहतक, गोहाना, सांपला व बहादुरगढ़ रूट पर अधिकतर निजी बसें ही चलती हैं। वीरवार को बहादुरगढ़ रूट पर जाने वाले यात्रियों को बस के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। आरोप है कि निजी बस संचालक महिलाओं के लिए 36 घंटे तक मुफ्त सफर की सुविधा की घोषणा के बाद लापरवाही बरत रहे हैं। जिस कारण यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। लंबे समय तक बसें न मिलने के कारण कई यात्रियों ने निजी वाहनों का सहारा लेने में ही भलाई समझी। हालांकि निजी बसों के परिचालन पर नजर रखने के लिए ड्यूटी इंस्पेक्टर नियुक्त किए गए थे।
सीट नंबर लेने के लिए लगी रही भीड़
सरकार ने भले ही रोडवेज बसों में बहनों के लिए मुफ्त में सफर की घोषणा की थी, लेकिन उनके बैठने की व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में महिलाओं को बसों में सीट पाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। बस अड्डे पर बने काउंटर पर टिकट लेने वालों को ही सीट नंबर दिया जा रहा था। जिस कारण महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ी। जो महिलाएं काउंटर पर जाकर सीट नंबर लेकर आईं, उन्हें भी सीट लेने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। ट्रेनों में भी रही भीड़
रक्षाबंधन पर्व पर बसों के साथ ही ट्रेनों में भी खासी भीड़ रही। पैसेंजर ट्रेनों के साथ ही मेल व एक्सप्रेस में भी खड़े होने तक की जगह नहीं मिल पा रही थी। यात्रियों को मजबूरन जान जोखिम में डालकर दरवाजे पर खड़े होकर सफर करना पड़ा। स्टेशन पर जो भी ट्रेन आती, उसमें चढ़ने के लिए यात्री धक्का-मुक्की करते रहे। अत्यधिक भीड़ होने के कारण कुछ यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने की जगह तक नहीं मिली। जिससे उनकी ट्रेन छूट गई। ऐसे यात्रियों ने फिर बस अड्डे का रुख किया।
रोडवेज डिपो में रोडवेज की 66 बसें हैं। इनमें 4 बसें खराब हैं। 62 बसों को सड़कों पर उतारा गया है। लंबे रूट पर चलने वाली बसों के फेरे कम कर लोकल रूटों पर चलाया गया है। पहले से लोकल रूटों पर चलने वाली बसों के फेरे बढ़ाए गए हैं, ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधा दी जा सके। -बलवान सिंह, डीआई, रोडवेज डिपो, सोनीपत।
रक्षाबंधन पर्व पर समय सारिणी के अनुसार बसों का परिचालन न कर सवारियों के अनुसार परिचालन किया गया है। जिस भी रूट पर सवारी अधिक हुई, उसी रूट पर बस को रवाना किया गया, ताकि यात्रियों को परेशानी न झेलनी पड़े। बस अड्डे से विभिन्न रूटों पर रवाना होने वाली सभी रोडवेज व निजी बसों की रिपोर्ट तैयार कर अधिकारियों को सौंप दी है। निजी बस संचालकों पर निगरानी रखने के लिए सभी रूटों पर अलग से ड्यूटी लगाई गई थी। सभी व्यवस्थाएं बेहतर रहीं। -सुरेंद्र ढुल, बस अड्डा पर्यवेक्षक, रोडवेज डिपो, सोनीपत।