सोनीपत। क्षेत्र का विकास सिर्फ बातों या कागजों में नजर आ रहा है। क्योंकि दिल्ली से सोनीपत होते हुए अंबाला तक यमुना के साथ बाईपास बनाने की परियोजना सिरे नहीं चढ़ पाई। गोहाना में करीब 238.54 करोड़ रुपये से बनने वाले बाईपास की योजना भी केवल सपना बनकर रह गई। यह योजना नौ साल बाद भी बाबुओं की मेज से धरातल पर नहीं उतर पाई है। गोहाना में लोक निर्माण विभाग की ओर से बाईपास का निर्माण करवाया जाना है, लेकिन अब इस कार्य में जमीन अधिग्रहण सबसे बड़ी रूकावट बना हुआ है।
तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने नवंबर 2015 में गोहाना बाईपास का निर्माण करने की घोषणा की थी। लोक निर्माण विभाग ने मामले में तत्परता दिखाते हुए करीब 238.54 करोड़ रुपये का बजट व प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा था। बाईपास के निर्माण को लेकर विभाग की ओर से सर्वे करने के बाद रिपोर्ट भी मुख्यालय भेजी जा चुकी थी। फरवरी 2019 में गोहाना बाईपास के निर्माण के लिए प्रशासनिक मंजूरी भी मिल चुकी थी। इसके बावजूद विभाग निर्माण कार्य शुरू करवाने के लिए सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। हालांकि वर्ष 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बाईपास पर उपलब्ध करवाई जाने वाली व्यवस्थाओं को लेकर उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर चुके थे, लेकिन उनकी ओर से मौके का निरीक्षण किया जाना था।
120 गांव, 52 कॉलोनियों व 23 वार्डों को मिलता फायदा
गोहाना क्षेत्र की पूर्व दिशा में रोहतक-पानीपत हाईवे पर बाईपास का पहले ही निर्माण किया जा चुका है, जबकि पश्चिमी दिशा में बाईपास बनाकर क्षेत्र के लोगों को सौगात दी जानी थी। बाईपास बनने से क्षेत्र के 120 गांव, 52 कॉलोनियों व 23 वार्डों के लोगों को फायदा मिल सकता था। निर्माण कार्य रोहतक-पानीपत हाईवे स्थित गांव माहरा से शुरू किया जाना था, जो जींद रोड को जोड़ते हुए करीब 8 किलोमीटर लंबा बनाया जाना था। साथ ही बाईपास तैयार होने के बाद शहर के चारों तरफ रिंग रोड का निर्माण भी किया जाना था। इससे महम, जुलाना, जींद, जुलाना, रोहतक, सोनीपत, खरखौदा, पानीपत व गन्नौर की तरफ आवागमन करने वाले वाहन चालकों को किसी भी मार्ग पर पहुंचने के लिए शहर के अंदर प्रवेश नहीं करना पड़ता। शहर के अंदर भारी वाहनों का आवागमन कम हो सकता था।
बाईपास निर्माण में यह बड़ी बाधा
तत्कालीन मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद विभाग ने बाईपास के निर्माण के लिए पोर्टल पर किसानों से जमीन के लिए आवेदन मांगे थे। इसके लिए गांव माहरा, ठसका, आहुलाना, वजीरपुरा व खंदराई के किसानों की जमीन अधिग्रहण करने की योजना तैयार की गई थी। किसान बाईपास के लिए जमीन मुहैया करवाने के लिए बदले में दोगुना मुआवजे की मांग कर रहे हैं। हालांकि सरकार कलेक्टर रेट पर किसानों से जमीन मुहैया करवाने की बात पर अडिग हैं। ऐसे में बाईपास के निर्माण को पंख लगने के बावजूद उड़ान जमीन पर आकर रूक गई है। यही कारण है कि परियोजना की रफ्तार धीमी होती चली गई।
क्षेत्रवासियों को जाम के झाम से मिलता छुटकारा
बाईपास के निर्माण से भारी वाहनों के शहर में प्रवेश पर प्रतिबंध लग जाता, लेकिन अब भारी वाहनों को शहर के बीचों-बीच से गुजरना पड़ रहा है। इससे जाम की स्थिति बनी रहती है। करीब 8 किलोमीटर लंबा बनने वाला बाईपास रोहतक, महम, बरोदा व जींद रोड से जोड़कर बनाया जाना था। पानीपत-रोहतक हाईवे स्थित गांव माहरा से शुरू होकर महम व जुलाना रोड होते हुए खंदराई मोड़ के पास जींद रोड तक बनाने की योजना तैयार की गई थी। साथ ही बाईपास पर तीन फ्लाईओवर का निर्माण भी योजना में शामिल था।
गोहाना क्षेत्र में बाईपास का निर्माण करवाने की योजना फिलहाल अधूरी है। बाईपास निर्माण के लिए किसान जमीन मुहैया करवाने को तैयार नहीं है। ऐसे में बिना जमीन के बाईपास का निर्माण नहीं करवाया जा सकता। लोक निर्माण विभाग बाईपास निर्माण के लिए तैयार है, लेकिन सरकार व किसानों के बीच बातचीत के बाद ही योजना को लेकर कोई रास्ता निकल सकता है।
- प्रशांत कौशिक, कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग