सोनीपत। कुंडली स्थित राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमशीलता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टम) में मिलेट्स (मोटा अनाज) को पोषण व आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का वीरवार को आगाज किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ मुख्यातिथि भारत सरकार में प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रीतपाल सिंह, पौध किस्म एवं किसान अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. त्रिलोचन महापात्रा व निफ्टम संस्थान के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने किया।
प्रो. सूद ने कहा कि भारतीय मोटे अनाजों को विश्व में अलग पहचान देने के लिए केंद्र सरकार प्रयास कर रही है। इसकी एक झलक निफ्टम में दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि विश्व में मोटे अनाज की बहुत मांग है, इसलिए उद्योगपति और किसान इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास करें, ताकि वो आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से ही आज पूरा विश्व 2023 को मिलेट्स वर्ष के रूप में मना रहा है। हाल ही में हुए जी-20 सम्मेलन के दौरान देश के विभिन्न शहरों में आयोजित 220 कार्यक्रमों में भारतीय मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए विदेशी प्रतिनिधियों ने उनसे बने व्यंजनों का स्वाद चखा और तारीफ की। प्रो. सूद ने कहा कि मोटा अनाज सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते है।
अंत में निफ्टम संस्थान के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने ‘मिलेट मार्वल्स’ पुस्तक और एक स्मारिका का विमोचन किया। उद्घाटन सत्र में संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य और कृषि संगठन का श्री अन्न के वैश्विक महत्व पर आधारित ऑडियो-विजुअल की प्रस्तुति दी गई।
प्रदर्शनी का किया अवलोकन
प्रो. अजय कुमार सूद ने मिलेट्स के क्षेत्र में कार्य कर रहे किसान व उद्योगपतियों की तरफ से निफ्टम में लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में श्रीअन्न से बने खाद्य उत्पाद, भोजन एवं अन्य सामग्रियों के स्टाल लगाए गए। साथ ही श्रीअन्न की श्रेणी में शामिल बाजरा, रागी, ज्वार, हरी कंगनी, कोदो, कंगनी आदि को प्रदर्शित किया। प्रो. सूद ने उद्योगपतियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आने वाला समय मिलेट्स के क्षेत्र में भारत का होगा।
जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए करें मोटे अनाज की खेती
देश के पौध किस्म एवं किसानों के अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश में मोटे अनाजों को बढ़ावा देने और भारत को विश्व में सबसे बड़ा अनाज निर्यातक देश बनाने के लिए श्रीअन्न योजना की शुरुआत की है। इससे किसानों को मोटे अनाजों का उत्पादन करने व युवाओं को इस क्षेत्र से जुड़े उद्योगों में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि मोटा अनाज मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए तो फायदेमंद है ही, इसके साथ पानी की बचत भी होती है। किसान जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मोटे अनाजों की खेती करें।
उद्देश्य : श्रीअन्न की लोकप्रियता फिर से हासिल हो
डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने बताया कि दुनिया खाद्य सुरक्षा और सतत विकास की जटिल चुनौतियों से जूझ रही है। तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ‘श्रीअन्न’ की लोकप्रियता फिर से हासिल हो। श्रीअन्न की विविधता, उनके अमूल्य पोषक गुणों, पर्यावरणीय लाभ व स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में सामाजिक चेतना और जागरूकता लाई जा सके।
12 देशों के प्रतिनिधि हुए शामिल
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 12 विभिन्न देशों संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, आयरलैंड, थाईलैंड, कोलंबिया, इंडोनेशिया, युगांडा, सर्बिया, नेपाल के प्रतिनिधि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव प्रीतपाल सिंह, निफ्टम की प्रोफेसर डॉ. अनुपमा सिंह सहित उच्च प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के कुलपति, निदेशक, वैज्ञानिक, शिक्षाविद शामिल हुए।