खरखौदा। उपमंडल नागरिक अस्पताल में वीरवार सुबह जन्म के कुछ समय बाद नवजात की मौत हो गई। जिसे चिकित्सकों ने पीजीआई, रोहतक रेफर किया था। शव को वापस अस्पताल लेकर पहुंचे परिजनों ने अस्पताल का गेट बंद कर हंगामा किया। वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डाॅ. जितेंद्र कुमार व डाॅ. सत्यपाल के समझाने पर परिजन मान गए और पुलिस के साथ शव को लेकर पोस्टमार्टम करवाने जिला नागरिक अस्पताल सोनीपत चले गए।
गांव सिसाना निवासी आरती को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उसे लेकर बुधवार देर रात उपमंडल नागरिक अस्पताल पहुंचे। जहां वीरवार सुबह पौने छह बजे आरती ने बेटे को जन्म दिया। आरती व गोपाल के घर तीन बेटियों के बाद बेटा हुआ था, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं रह सकी।
गोपाल का आरोप है कि डिलिवरी के दौरान प्रसूति कक्ष में न तो स्टाफ नर्स थी, न ही डाॅक्टर। जिसके कारण खुद ही हुई डिलिवरी के दौरान नवजात जमीन पर आ गिरा। चोट लगने से उसकी मौत हो गई। चिकित्सकों की ओर से नवजात को पीजीआई, रोहतक रेफर किया गया था, जहां उसकी मौत होने पर परिजन शव लेकर वापस अस्पताल पहुंचे और गेट को बंद कर हंगामा शुरू कर दिया। उनकी मांग थी कि जिम्मेदार स्टाफ नर्सों व चिकित्सक पर कार्रवाई की जाए। वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डाॅ. जितेंद्र कुमार व डाॅ. सत्यपाल ने उनको समझा-बुझाकर शांत कराया और लिखित में शिकायत देने की बात कही। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।
तीन बेटियों के बाद पैदा हुआ था बेटा
नवजात की मौत से परिजन आहत हैं। उनका कहना है कि तीन बेटियों के बाद बेटे का जन्म हुआ था, लेकिन उसकी डिलिवरी के दौरान मौत हो गई, जिसमें अस्पताल की ओर से लापरवाही की गई है। उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
आठवें महीने में डिलिवरी हुई
चिकित्सकों का कहना है कि नवजात के गिरने जैसा कोई मामला नहीं है। आठवें महीने में डिलिवरी हुई है। जिसके चलते स्वास्थ्य जांच के लिए नवजात को पीजीआई, रोहतक भेजा गया था। जहां पर उसकी मौत हुई है।
वर्जन
नवजात की मौत के मामले में परिजनों से पीजीआई, रोहतक के रिकाॅर्ड सहित शिकायत मांगी गई है, जिस पर कमेटी से जांच करवाई जाएगी। वहीं पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में भी मौत के कारण स्पष्ट होंगे। जिसके आधार पर कार्रवाई होगी।
डाॅ. सत्यपाल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, उपमंडल नागरिक अस्पताल, खरखौदा।