सोनीपत। फसल अवशेष में आग लगाने की घटनाओं को रोकथाम के लिए कृषि विभाग ने पहल शुरू कर दी है। इसके लिए विभाग ने टीमों का गठन कर उन्हें फील्ड में उतार दिया है। कृषि विभाग की टीम के साथ ही ग्राम सचिव व पटवारी भी अपने क्षेत्र में आगजनी की घटनाओं पर नजर रखेंगे। कृषि विभाग किसानों को फसल अवशेष में आगजनी करने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करेगा। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे तथा किसानों को शपथ दिलवाई जाएगी कि वह फसल अवशेष में आग नहीं लगाएंगे।
रबी सीजन की फसलों की कटाई और कढ़ाई का काम अब तेजी से जारी है। ऐसे में फसल अवशेषों में आगजनी की घटनाएं होने की आशंका भी बढ़ गई है। फसल अवशेषों में आगजनी से एक तरफ जहां प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, वहीं दूसरी तरफ भूमि में पोषक तत्व भी नष्ट होते हैं। इसके अतिरिक्त पशु चारे की कमी भी हो जाती है। ऐसे में फसल अवशेष में आगजनी को रोकने के लिए कृषि विभाग ने पहल शुरू कर दी है।
सेटेलाइट से भी रखी जा रही है नजर
फसल अवशेष में आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए सेटेलाइट से भी नजर रखी जा रही है। इस दौरान अब तक प्रदेश में आगजनी की सात लोकेशन प्राप्त हो चुकी हैं। हालांकि सोनीपत जिले में अभी कोई लोकेशन अधिकारिक तौर पर कृषि विभाग के पास नहीं आई है। फसलों के अवशेष में आगजनी करने पर किसान पर 2500 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जुर्माना लगाया जाता है। सेटेलाइट से लोकेशन प्राप्त होते ही कृषि विभाग की टीम दो घंटे के अंदर घटना स्थल का भौतिक सत्यापन करती है। इस दौरान संबंधित लोकेशन पर फसल अवशेष में आगजनी हुई मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
डेढ़ लाख हैक्टेयर भूमि में उगाई गई थी गेहूं की फसल
रबी सीजन में सोनीपत जिले में किसानों ने डेढ़ लाख हैक्टेयर भूमि में गेहूं की फसल उगाई गई है। वर्तमान में फसल की कटाई व कढ़ाई का काम शुरू हो गया है। किसानों ने अब मशीनों के माध्यम से भी गेहूं की कटाई करवानी शुरू कर दी है। इसके अतिरिक्त सरसों की कटाई व कढ़ाई का काम भी चल रहा है। कृषि विभाग ने किसानों का आह्वान किया है कि वह गेहूं की मशीन से कटाई करवाने के बाद बचे हुए अवशेषों का तूड़ा बनवाए, ताकि पशुओं के लिए चारे की किसी प्रकार की कमी न रहे।
फसल अवशेषों में आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए ग्राम स्तर पर टीमों का गठन किया गया है। किसानों को फसल अवशेषों में आगजनी न करने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। ब्लाक स्तर पर विशेष कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। किसानों का आह्वान किया जा रहा है कि फसल अवशेष को पशु चारे के रूप में इस्तेमाल करें।
डॉ.पवन शर्मा, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत