हरियाणा सरकार की ओर से गत महीने हुए उपद्रव में अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए गठित प्रकाश सिंह जांच समिति ने शनिवार को शहर में दौरा किया। समिति ने उपद्रव से प्रभावित सभी दुकानदारों से मिलकर उनकी व्यथा सुनी और घटना से जुड़ी जानकारी ली। समिति ने आम लोगों को विश्वास दिलाया कि जांच के बाद निष्पक्ष नतीजे सामने आएंगे।
फरवरी माह में आरक्षण की मांग को लेकर जाटों ने आंदोलन शुरू किया था। अपनी मांग को लेकर जाटों ने सड़क मार्ग और रेल मार्ग जाम कर दिया था। चार दिन आंदोलन शांतिपूर्वक चला, लेकिन पांचवें दिन इसने हिंसक मोड़ ले लिया। कई शहरों में उपद्रवियों ने व्यापारियों की दुकानें, मजदूरों की रेहड़ी, स्कूल और कई संस्थानों में पहले लूटपाट और तोड़फोड़ की और बाद में उसे लूटकर आग के हवाले कर दिया। ऐसा ही हाल गोहाना शहर में देखने को मिला जहां कई दुकानदारों का रोजगार तक छिन गया था। पूरे आंदोलन के दौरान प्रशासन और उसके अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए सरकार ने प्रकाश सिंह जांच कमेटी का गठन किया था। समिति में अध्यक्ष प्रकाश सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयवर्द्धन सिंह और डीजीपी क्राइम डॉ. केपी सिंह शामिल थे। समिति के सदस्यों ने शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उपद्रव की भेंट चढ़े स्थानों का दौरा किया। आयोग के सदस्यों ने शहर के मुख्य चौराहे फौव्वारा चौक, पालिका बाजार, रोहतक गेट, महम मोड़, समता चौक और शहीद चौक का दौरा किया और दुकानदारों से बातचीत की। जहां उन्होंने दुकानदारों को निष्पक्ष जांच करने का आश्वासन दिया है। इस मौके पर डीएसपी राजेश कुमार, स्पेशल ड्यूटी पर आए डीएसपी जितेश कुमार, तहसीलदार हरीओम बिश्नोई, नायब तहसीलदार संजीव मलिक, जिला बीजेपी अध्यक्ष डॉ. धर्मवीर नांदल, आनंद सिंह हुड्डा, मलिक राज मलिक, डॉ. ओपी शर्मा आदि उपस्थित रहे।
आंखों के सामने जलाई दुकान और पीटकर बैठा दिया चारपाई पर
समिति सबसे पहले फौव्वारा चौक स्थित ग्रोवर क्लाथ हाउस पर पहुंची। जहां दुकान मालिक दिनेश ने समिति को बताया कि 20 फरवरी को प्रशासन ने सभी दुकानें बंद करा दी थी। वह भी अपनी दुकान बंद कर घर चले गए। दोपहर करीब दो बजे सैकड़ों उपद्रवी आए और पहले दुकान के शटर को काटा। जो लूट पाए लूट लिया और बाद में दुकान को आग के हवाले कर दिया। इतना नहीं जब उन्होंने उपद्रवियों से आग न लगाने की अपील की तो उसके पिता और उसको पीट-पीटकर घायल करने के बाद चारपाई पर बैठा दिया। सूचना देने के बाद भी पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। आंखों के सामने अपना रोजगार जलते देख परिवार आज भी सदमे से उबर नहीं पाया है। लाखों रुपये का नुकसान हुआ, लेकिन मुआवजा केवल दो लाख रुपये ही मिला है।
जिंदगी भर की कमाई एक ही पल में हुई खाक
खुराना जनरल स्टोर के मालिक मनोज ने बताया कि पिता ने जिंदगी भर की कमाई कर एक दुकान बनाई थी। उपद्रवी आए और पहले लूटपाट की और बाद में आग लगा दी। जिंदगी भर की कमाई एक ही पल में जलकर राख हो गई। इस दौरान समिति के सदस्यों ने पूछा कि पुलिस किस समय आई तो दुकानदार ने बताया कि पुलिस नाम की शहर में कोई चीज ही नहीं थी। आज हालात हैं यह हैं कि उन्हें खाने तक के लाले पड़े हैं।
हमने तो भागकर बचाई जान, माल तो दोबारा आ जाएगा
मेहता इंटरप्राइजेज के मालिक महेंद्र ने बताया कि सैकड़ों उपद्रवियों ने दुकान का पहले शटर काटा और तोड़फोड़ कर लूटपाट की। इसके बाद उपद्रवी वहां से चले गए। दुकान को देखने के लिए जब वह वहां पहुंचे तो दोबारा फिर उपद्रवी आ गए और अबकी दुकान को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान उन लोगों ने किसी तरह भागकर जान बचाई।
एक करोड़ का नुकसान, मुआवजा सिर्फ 10 लाख रुपये
अंदाज गारमेंट के मालिक महिपाल ने बताया कि उनके पिता ने हरियाणा सरकार में रहकर अपना फर्ज निभाया था तो वहीं भाई ने एयर फोर्स में नौकरी करते हुए देश के लिए कारगिल का युद्ध लड़ा था। जिंदगी की सारी कमाई जोड़कर एक शोरूम बनाया था। जिसमें बच्चों से लेकर बड़ो तक के कपड़े मिलते थे। उपद्रवियों ने पहले शोरूम में लूटपाट की, तोड़फोड़ की और बाद में आग के हवाले कर दिया। सारा शोरूम राख हो गया। एक करोड़ का नुकसान हुआ है जबकि सरकार ने 10 लाख रुपये मुआवजा दिया है।
एक महीने बाद भी नहीं हुई दुकानों की मरम्मत शुरू
रवि ट्रेड़िग कंपनी के मालिक बंसीलाल ने बताया कि उनकी बिजली के सामान की दुकान थी। उपद्रवियों ने दुकान का शटर काटकर तोड़फोड़ की और बाद में आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा किसान क्लाथ हाउस को पहले लूटा और बाद में आग के हवाले कर दिया। जिससे लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। उनकी दुकान नगर परिषद के अंडर में आती हैं। एक महीना हो गया, अभी तक दुकानों की मरम्मत तक शुरू नहीं हुई है। इस पर समिति ने एसडीएम को तुरंत काम शुरू कराने के निर्देश दिए है।
मेरी दुकान में दो बार लगाई आग
मुकेश पुस्तक भंडार के मालिक मुकेश ने बताया कि उनकी दो मंजिला इमारत थी। उपद्रवियों ने दो बार दुकान में लूटपाट कर आग लगाई। आग लगने की सूचना पुलिस और फायरब्रिगेड को दी गई। फायरब्रिगेड आई तो लेकिन दो मिनट में ही पानी डालकर वापस चली गई। दुकान की ऊपरी मंजिल में आग बुझाने को कहा तो मना कर दिया। उन्होंने बाल्टी से पानी डालकर आग पर काबू पाना चाहा, लेकिन संभव नहीं हो सका। देखते ही देखते दुकान लपटों में घिर गई और कई दिन बाद तक धुआं उठता रहा। गत सीजन नजदीक था तो दुकान भरी थी, लेकिन सारा सामान जलकर राख हो गया। पुलिस नाम तो शहर में देखने को भी नहीं था।
इतने हथियार कहां से आए
दुकानदार सीमा ने बताया कि उसकी जूतियों की दुकान थी। उपद्रवियों ने पहले दुकान में लूटपाट की और बाद में आग लगा दी। सैकड़ों की संख्या में उपद्रवी थे। जिनके पास कई हथियार थे। उनके पास यह हथियार कहां से आए और अब तक क्यों नहीं पकड़े गए। जान जाने के डर से वह घर छोड़कर चले गए थे। डर लग रहा था कि कहीं बच्चों को कोई नुकसान न हो जाए। इस पर टीम ने उन्हें उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। इसके बाद उन्होंने दलित युवक विक्रम की मौत के घटनास्थल और शहर के सामान्य बस स्टैंड पर भी जायजा लिया।
संकट के समय बढ़ जाती है अधिकारी की भूमिका : प्रकाश सिंह
समिति के अध्यक्ष प्रकाश सिंह ने अधिकारियों से कहा कि उनका भी कानून व्यवस्था को लेकर 35 वर्ष तथा अलग-अलग राज्यों में काम करने का अनुभव रहा है। संकट के समय में अधिकारी की भूमिका और ज्यादा बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित जानकारी तथ्यों सहित उन्हें दें।