पत्रकारवार्ता के दौरान डीआईजी और साथ में अजय का एनकाउंटर करने वाली टीम।
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पुलिस के लिए सिरदर्द और गांव करेवड़ी के लिए आतंक का दूसरा नाम अजय उर्फ कन्नू के एनकाउंटर के बाद टीम ने शुक्रवार को डीआईजी कम एसपी एचएस दून से मुलाकात की। इसके बाद हुई पत्रकार वार्ता में डीआईजी ने डीएसपी राहुल देव के नेतृत्व वाली टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि पुलिस जवानों ने बिना डरे अपना काम किया। डीआईजी ने बताया कि पंजाब के जगा रामतीर्थ में हुई इस कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों ने भी धोखे में पुलिस पार्टी पर हमला कर दिया था। इस दौरान डेरे के बाबा ने भी एक जवान के हाथ पर डंडा मार दिया था। इसके बावजूद पुलिस जवान घबराए नहीं और अपना काम पूरी मुस्तैदी के साथ किया। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री और डीजीपी ने सोनीपत पुलिस को बधाई दी है और डीजीपी ने उनकी टीम को स्वयं पुरस्कृत करने की घोषणा की है। आईजी सीआईडी अनिल राव, रोहतक रेंज के आईजी संजय कुमार ने भी टीम को बधाई दी है। दून ने बताया कि जल्द ही सोनीपत पुलिस अजय के चारों साथियों गांव बली कुतुबपुर का राकेश उर्फ काला, करेवड़ी का रोहित उर्फ नीटू और दीपक उर्फ फोर्ड तथा पंजाब के जिला मानसा के गांव धिंगर का भोला को प्रोडक्शन वारंट पर लाएगी। दूसरी ओर अजय के शव का गांव करेवड़ी में अंतिम संस्कार किया गया।
टीम में शामिल थे 27 पुलिसकर्मी
आरोपियों को डीएसपी राहुल देव के नेतृत्व में एसआईटी प्रभारी संदीप धनखड़, सीआईए प्रभारी इंदीवर और निरीक्षक कंवल की टीम में शामिल कुल 27 पुलिसकर्मियों ने काबू किया है। पूरी टीम काफी समय से अजय के पीछे थी। डीआईजी ने बताया कि कई मौके पर टीम सिर्फ 5 मिनट के अंतर से अजय को पकड़ने में नाकामयाब हो गई थी, लेकिन गुरुवार को ऐसा नहीं हुआ। इस कार्रवाई के दौरान पंजाब पुलिस का भी सहयोग मिला। बठिंडा के एसएसपी स्वप्न शर्मा स्वयं इस मामले को देख रहे हैं। पूरे ऑपरेशन में पंजाब पुलिस के एएसआई अमरीक सिंह ने काफी सहयोग दिया।
भारी मात्रा में हथियार बरामद
आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने भारी मात्रा में हथियार बरामद किए हैं। इनमें एक पिस्तौल 9 एमएम और कारतूस, एक पिस्तौल 32 बोर और चार कारतूस, एक पिस्तौल 12 बोर और 19 कारतूस, दो पिस्तौल 315 बोर और 21 कारतूस तथा एक रिवाल्वर 32 बोर और एक कारतूस मिला है। कन्नू के साथियों से पांच-पांच हजार रुपये बरामद किए गए हैं।
रात भर जागते थे गांव के लोग : डीआईजी
पत्रकार वार्ता के दौरान डीआईजी ने माना कि गांव में अजय के नाम का खौफ फैल चुका था। जगबीर और अनिल की हत्या के बाद से तो गांव के लोग अपने बच्चों को अपनी नजरों के सामने ही रखते थे। डीआईजी ने कहा कि गांव में लोग रात-रात सोते नहीं थी। अब कन्नू की मौत के बाद से गांव में तनाव कम हुआ है।