गांव जाट जोशी से एक सप्ताह पहले अपहृत किसान सत्यप्रकाश की हत्या कर दी गई। पुलिस और एसआईटी की संयुक्त टीम की गिरफ्त में आए अपहरण कर तीन करोड़ की फिरौती मांगने के इस मामले के एक आरोपी ने यह खुलासा किया है। यह आरोपी पानीपत के मानाना का अमित उर्फ मिंटू है। मुख्य आरोपी अपहृत किसान के भांजे समेत दो आरोपी फरार हैं।
पुलिस के अनुसार अमित उर्फ मिंटू ने प्रारंभिक पूछताछ में बताया कि सत्यप्रकाश को बुलाने के लिए पांच सितंबर को वह खुद ही गया था। खेतों में काम कर रहे सत्यप्रकाश को वह अपने साथ ले गया। उसने और उसके दोस्त नीरज ने सत्यप्रकाश के भांजे सुमित के कहने पर सत्यप्रकाश का अपहरण किया।
बकौल पुलिस, अमित ने बताया कि अपहरण के बाद तीन करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की गई थी। बाद में साथियों के साथ मिलकर नामुंडा गांव समालखा के नजदीक दिल्ली डबल नहर की पटरी के पास गोली मारकर सत्यप्रकाश की हत्या कर शव को दबा दिया था। गिरफ्तार आरोपी को अदालत में पेश कर तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
सुमित का ड्रामा पड़ गया उस पर भारी
सीआईए प्रभारी इंदीवर ने बताया कि जब उन्होंने जांच शुरू की तो पता चला कि गजे सिंह निवासी मनाना ने नौ सितंबर को अपने बेटे सुमित की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई है। सुमित रिश्ते में सत्यप्रकाश का भांजा लगता था (सत्यप्रकाश सुमित की मां के मामा का लड़का था)। इसी कारण सुमित पर पुलिस की शक की सुई घूम गई थी। जांच-पड़ताल की तो सुमित के दो दोस्तों नीरज और अमित के बारे में पता चला।
अमित की फोटो लेकर गांव में दिखाई तो ग्रामीणों ने बताया कि यही लड़का आखिरी बार सत्यप्रकाश के साथ देखा गया था। यहीं से पुलिस का शक यकीन में तब्दील हो गया और अमित को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में अमित ने सब कुछ उगल दिया।
शव निकाला, बोर्ड द्वारा होगा पोस्टमार्टम
अमित को रविवार को अदालत में पेश कर तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड में सबसे पहले अमित को नामुंडा, समालखा (पानीपत) स्थित उस जगह ले जाया गया, जहां पर सत्यप्रकाश का शव दफनाया गया था।
देर शाम तक ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सत्यप्रकाश का शव बरामद किया जा सका। कागजी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के बोर्ड से करवाने की ठानी है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक शव को सोनीपत नहीं लाया जा सका था।
3 करोड़ तो क्या 3 लाख भी नहीं देंगे
सूत्रों की मानें तो अमित और नीरज दोनों ही सुमित के साथ वारदात स्थल पर थे। पांच सितंबर को अपहरण करने के बाद दो दिनों तक तीनों ने सत्यप्रकाश को अपने कब्जे में रखा था। 7 सितंबर की रात वह तीनों सत्यप्रकाश के साथ नामुंडा के पास नहर किनारे पहुंचे थे।
यहीं से सत्यप्रकाश के भाई के पास फिरौती के लिए फोन किया गया। बताया जा रहा है कि जब तीन करोड़ की फिरौती मांगी गई तो सत्यप्रकाश ने कहा कि उसे तीन करोड़ तो क्या तीन लाख भी नहीं देंगे। इस बात पर सुमित गुस्सा हो गया और तैश में आकर सत्यप्रकाश को गोली मार दी।
क्यों किया अपहरण, बताएगा सुमित
अमित से अभी तक इस बात का पता नहीं चल पाया है कि सुमित ने अपने दोस्तों के साथ अपने ही मामा सत्यप्रकाश का अपहरण क्यों किया था। पुलिस के अनुसार इस बारे में सुमित ही बता पाएगा। हालांकि इस मामले में गिरफ्तार किए गए अमित की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है, लेकिन सुमित के दूसरे साथी नीरज को लेकर पुलिस संशय में है। पुलिस इसकी भी जांच कर रही है कि सुमित के पास हथियार कहां से आया।
ये है मामला
गांव जाट जोशी निवासी भूपेंद्र ने बहालगढ़ चौकी पुलिस को शिकायत दी थी। इस आधार पर सात सितंबर को मामला दर्ज किया गया था। भूपेंद्र ने बताया कि पांच सितंबर को उसका भाई सत्यप्रकाश घर पर था तो उसके मोबाइल पर किसी ने फोन कर उसे खेत में बुलवाया था। खेत में जाने के बाद उसका भाई अचानक लापता हो गया। परिजनों ने उसका पता लगाने का प्रयास किया, लेकिन सुराग नहीं लग सका। सात सितंबर को उसके पास फोन आया कि उसका भाई सत्यप्रकाश उनके कब्जे में है। तीन करोड़ रुपये का इंतजाम उसे छुड़वाने के लिए कर लो। भूपेंद्र के बयान पर बहालगढ़ चौकी पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था।