गांव तिहाड़ कलां में 11 साल पहले संदीप की हत्या करने के मामले में अदालत ने एक आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। उसके दो अन्य साथियों को 9 साल पहले ही सजा सुनाई जा चुकी थी। जबकि यह आरोपी वारदात के समय से ही फरार था। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जगदीप की अदालत ने अब इस फरार अपराधी को दोषी करार दिया है। दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी किया गया है, जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
गांव तिहाड़ कलां निवासी रवींद्र ने सात अक्टूबर, 2004 को सदर थाना में शिकायत दी थी। शिकायत में उसने बताया था कि उसके भाई संदीप की गांव के ही मिंटू, अनिल और गांव गोपालपुर निवासी धन्ना उर्फ धन्ने के साथ दोस्ती थी। वह अक्सर उसके भाई को देर शाम घर से बुलाकर ले जाते थे। 6 अक्टूबर को उसकी मां सावित्री ने संदीप को उनके साथ बाहर जाने से मना किया था तो मिंटू ने कहा था कि उसे कैसेट लेनी है, इसके बाद संदीप उनके साथ बाहर चला गया था। रवींद्र के अनुसार रात को भी संदीप वापस नहीं लौटा था। सुबह के समय सतपाल के खेतों में उसके भाई का शव पड़ा मिला था, उसकी हत्या तेजधार हथियारों से की गई थी। इस मामले में पुलिस ने रवींद्र की शिकायत के आधार पर मिंटू, अनिल और धन्ना के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था। हालांकि जांच के दौरान गांव के ही संदीप और मिंटू को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में तीसरा आरोपी धन्ना वारदात के बाद से ही फरार चल रहा था। वर्ष 2006 में जिला अदालत ने मिंटू और संदीप को उम्रकैद की सजा सुनाई थी और धन्ना को फरार अपराधी घोषित किया था। धन्ना कुछ समय पहले ही पुलिस की गिरफ्त में आया था, अब अदालत ने धन्ना को भी उम्रकैद की सजा सुनाई है।
झपटमारी करते थे अनिल, मिंटू और धन्ना
रवींद्र ने शिकायत में बताया था कि अनिल, मिंटू और धन्ना झपटमारी करते थे। इसी तरह के अपराध में उसके भाई को भी शामिल करते थे। इसीलिए संदीप पर साथ रहने का दबाव बनाया जाता था। मामले में गिरफ्तार किए मिंटू और संदीप ने भी पुलिस के समक्ष स्वीकार किया था वे लोग झपटमारी करते थे। इस तरह की वारदात में शामिल न होकर संदीप उनकी पोल खोल सकता था, इसीलिए उसकी हत्या की थी।