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खुला छोड़ दिया बंदी, गप हांकते रहे पुलिसकर्मी

Sun, 29 Nov 2015 12:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
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सेवा, सुरक्षा और सहयोग का नारा आम आदमियों के लिए है, लेकिन हमारे जिले की पुलिस इन तीनों में ही कितनी लापरवाह है, यह सबको पता है। सेवा को छोड़ दें तो जेल की मजबूत सलाखों के पीछे बंद अपराधियों की सुरक्षा तो पुलिस कर्मी कर नहीं पाते, लेकिन गाहे-बगाहे अपराधियों को खुला छोड़ कर उनका सहयोग जरूर करते हैं। प्रत्यक्ष उदाहरण शनिवार को दोपहर के समय देखने को मिला। जब एक बंदी को उपचार के लिए सामान्य अस्पताल में लाया गया था। अस्पताल में उपचार के उपरांत बंदी को रेफर कर दिया तो शायद पुलिस कर्मी भी निश्चिंत हो गए। उपचार के उपरांत जब बाहर पहुंचे तो बंदी को खुला छोड़ दिया गया। आलम ये था कि बंदी के हाथ की हथकड़ी के साथ बंधी ही जंजीर का दूसरा छोर भी स्वयं उसी ने पकड़ रखा थी। एक पुलिस कर्मी कान पर फोन लगाए इधर-उधर टहल रहा था तो दूसरा भी किसी अन्य के साथ गप्पे हांकने में व्यस्त था। जबकि बंदी एंबुलेंस के पास इस इंतजार में खड़ा रहा कि पुलिस कर्मी आए तो वे रोहतक की ओर कूच करें।
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दोपहर में लाए थे बंदी को, शाम तक जेल
बताया जा रहा है कि जिला जेल से भज मोहम्मद नाम के इस बंदी को दोपहर के समय सामान्य अस्पताल लाया गया था। लगभग डेढ़ बजे भज मोहम्मद को रोहतक पीजीआई रेफर किया गया था। इस बीच भज मोहम्मद को ग्लूकोज भी चढ़ाई गई थी। बताया गया कि अचानक से बीमार पडने पर उसे अस्पताल लाया गया। हालांकि रोहतक पीजीआई पहुंचकर भी उसे उपचार दिया गया और तुरंत छुट्टी भी दे दी गई थी।

यूं चला बातों और इंतजार का दौर
बंदी भज मोहम्मद को जब अस्पताल से बाहर लाया गया तो साथ आए दोनों पुलिसकर्मियों में से एक भी उसके साथ नहीं था। इमरजेंसी से बाहर निकलते हुए एक पुलिसकर्मी आगे-आगे चल रहा था, जबकि जो साथ में चल रहा था वह फोन पर बातें करने में व्यस्त था। एंबुलेंस के पास पहुंचते ही एक पुलिसकर्मी तो एंबुलेंस के पास खड़ा रहा, वहीं दूसरा फोन पर बातें करते हुए इधर-उधर ठहलने लगा। लगभग तीन मिनट के अंतराल के बाद फोन पर बातें खत्म कर पुलिस कर्मी पहुंचा तो भज मोहम्मद और दोनों पुलिस कर्मी एम्बुलेंस में सवार हो गए। बता दें कि अस्पताल से निकलने से लेकर एंबुलेंस में बैठने तक भज मोहम्मद पूरी तरह से आजाद था। बस हाथ में हथकड़ी थी, जिसकी जंजीर का दूसरा सिरा भी उसी के हाथ में था।
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जेल बदलने की मांग को लेकर था भूख हड़ताल पर?
भज मोहम्मद को अस्पताल में क्यों लाया गया, इस प्रश्न का जवाब अस्पताल में पुलिसकर्मियों ने नहीं दिया, लेकिन जैसा कि एक डॉक्टर ने बताया कि पुलिसकर्मी बता रहे थे कि यह बंदी एक सप्ताह से जेल में भूख हड़ताल पर था। अपनी जेल बदलने की मांग को लेकर इसने भूख हड़ताल कर रखी थी, लेकिन शनिवार को सुबह के समय अचानक तबीयत खराब हो गई। इसीलिए आननफानन में इसे अस्पताल लाया गया। बताया जा रहा है कि भज मोहम्मद मूलरूप से अफगानिस्तान का रहने वाला है और लगभग डेढ़ साल पहले कुंडली से स्मैक तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि भूख हड़ताल के बारे में कोई भी अधिकारी पुष्टि नहीं कर रहा।

एसपी, डीएसपी ने नहीं उठाया फोन
पुलिसकर्मियों की लापरवाही के मामले में जब आला अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो संपर्क नहीं हो पाया। डीएसपी हेडक्वार्टर के मोबाइल नंबर पर कॉल की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। दूसरी ओर एसपी आवास पर फोन किया गया तो वहां भी फोन रिसीव नहीं किया गया।

मैं वैसे तो ट्रेनिंग के चलते बाहर हूं, लेकिन अन्य अधिकारियों से पूछा था। भूख हड़ताल जैसा कोई मामला नहीं है। बंदी की तबीयत खराब हो गई थी, इसीलिए उसे अस्पताल भेजा गया था। बाद में रोहतक रेफर किया गया था, शाम तक वापस जेल में छोड़ दिया गया।
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-जयकिशन छिल्लर, जेलर, सोनीपत जेल
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