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भाई ने जताया पुलिस से खतरा, मांगी सुरक्षा

Mon, 26 Oct 2015 12:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
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शहर के देवीनगर में गुरुवार सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में हुई दलित युवक की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मृत युवक गोविंदा के भाई गौतम ने पुलिस और अन्य दबंग लोगों से जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा देने की मांग की है। उसका कहना है कि जिस दिन उसके भाई की मौत हुई थी उस दिन पुलिस के अधिकारी और अन्य दबंग लोग उसे धमकी देने आए थे। जिसके बाद उसने उच्च अधिकारियों से सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की थी, लेकिन अब तक उसे सुरक्षा नहीं मिली है। शनिवार को एसआईटी टीम आई थी। उन लोगों ने सारी घटना के बारे में पूछा। इस तरह की टीमें तीन दिन से घर पर आ रही हैं। हालांकि अभी तक यह पता नहीं चला कि यह क्या करेंगे। उसने कहा कि अगर उसके भाई को मार सकती है तो उसे मारने में भी कोई कोताही नहीं बरतेगी। किसी भी समय मुझ पर हमला हो सकता है। अब तो ऐसा लगता है कि पुलिस ही उसकी दुश्मन बन चुकी है, क्योंकि और तो कोई उसका दुश्मन है नहीं। इसीलिए हमें सुरक्षा मिलनी चाहिए। उसने एसआईटी की बजाय पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।
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यह है घटना
गौरतलब है कि 22 अक्टूबर की सुबह देवीनगर के एक मकान में एक दलित किशोर गोविंदा (14) का शव संदिग्ध हालत में मिला था। इसके बाद परिजनों ने लगभग साढ़े तीन घंटे तक गोहाना-जुलाना मार्ग और रोहतक-पानीपत रेलवे ट्रैक जाम कर दिया था। आरोप था कि पुलिस ने गोविंदा को पहले चोरी के झूठे केस में फंसाया और बाद में थाने में बुलाकर उसकी हत्या कर शव को उसी के ताऊ के घर में डालकर फरार हो गए थे। घटना की सूचना पर एसडीएम धर्मेंद्र सिंह ने पुलिस के अधिकारियों के साथ पहुंचकर उनकी मांगों को मानने का आश्वासन दिया था। जिसके बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम रोहतक पीजीआई में करवाया। हालांकि पुलिस ने एएसआई सुभाष और एएसआई अशोक के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था, लेकिन गुरुवार देर शाम परिजनों ने शव का दाह संस्कार करने से मना कर दिया था। मांग थी कि दोनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर उनके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। पुलिस इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं थी। घटना के एक बाद दिन राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह परिजनों से मिलने के लिए पहुंचे थे। जहां उन्होंने परिजनों के साथ मुलाकात की और प्रशासन को आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया था। जिसके बाद परिजनों ने गोविंदा का अंतिम संस्कार किया था। सरकार की ओर से मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी टीम की जांच की है। इतना ही नहीं स्पेशल एफएसएल टीम का गठन भी किया गया है।

इनेलो प्रवक्ता ने किया, बहन की शादी का खर्चा देने का ऐलान
इनेलो के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. केसी बांगड़ रविवार को परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे। बांगड़ ने कहा कि पुलिस पर सरकार की कोई पकड़ नहीं है। इस केस में एसआईटी गठन करना मात्र छलावा है। अमित भाटिया को एसआईटी इंचार्ज बनाया गया है। यह वही अमित भाटिया हैं, जिन्हें गोहाना पीएनबी कांड में बनी एसआईटी टीम के सदस्य थे। आज तक किसी लॉकर धारक को कुछ नहीं मिला है। हमारी मांग है कि इसकी जांच सीबीआई करें। मुख्यमंत्री का युवक की मौत पर आत्महत्या का बयान देना अपरिपक्वता का सबूत है। मुख्यमंत्री को चाहिए कि पीड़ित परिवार को 10 लाख का मुआवजा दें। इस दौरान उन्होंने परिजनों को 51 हजार की नकद राशि दी और गोविंदा की बहन की शादी का खर्चा देने का ऐलान किया।
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संदेह दूर करने को सीबीआई को सौंपे जांच: किरण चौधरी
कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने कहा कि पुलिस ने युवक को मारने में बड़ी बर्बरता दिखाई है। क्योंकि युवक के शरीर पर कई जगह चोट के निशान और पैरों के नाखून तक उखाड़े गए हैं। इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से होनी चाहिए। जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए। अगर यहां की पुलिस को इस मामले की जांच सौंपी गई तो मामले के पूरे तथ्य सामने नहीं आएंगे। क्योंकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर तो कहते हैं कि युवक ने आत्महत्या की है, लेकिन तथ्य यह दर्शा रहे हैं कि उसकी हत्या की गई है। दलितों पर हो रहे इन अत्याचारों के खिलाफ कांग्रेस पार्टी विधानसभा में पूरी तरह से आवाज उठाएगी।

सीएम का बयान गैर सामाजिक: शकुंतला खटक
कलानौर हल्के की कांग्रेस विधायक शकुंतला खटक ने कहा कि मुख्यमंत्री का युवक की हत्या को आत्महत्या बताना गैर जिम्मेदाराना बयान हैं। इसकी हम घोर निंदा करते हैं। ऐसे बयान वें ही लोग दे सकते हैं जो गैर राजनीतिक और गैर सामाजिक हों। सामाजिक और राजनैतिक लोग ऐसा बयान नहीं देते। परिवार को न्याय देने व दोषियों को सजा देने के लिए पूरे मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।

हर प्रकार से विफल है सरकार : अनूप
उकलाना कलां के इनेलो विधायक अनूप धानक ने कहा कि जब से प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी हैं तब से दलितों ही नहीं, बल्कि अन्य जातियों के साथ भी अत्याचार बढ़े हैं। यह सरकार हर प्रकार से विफल हैं। गोहाना का यह कांड सुसाइड नहीं है। इसकी पूरी तरह से सीबीआई जांच होनी चाहिए। जब सरकार का यह बयान है तो पुलिस का भी यही बयान होगा। इसके अलावा परिवार को सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता दी जाए और दोषियों को सख्त सजा दी जाए। अगर पुलिस इसकी जांच करेगी तो सही नहीं होगी। इसीलिए इसकी जांच सीबीआई से ही होनी चाहिए।
मामले को जातीय रंग नहीं दें: मदीना
गठवाला खाप के राष्ट्रीय महासचिव अशोक मदीना ने कहा कि युवक की मौत का मामला कोई भी टीम करें। वह जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। किसी निर्दोष को इसमें घसीटा न जाए और दोषियों को छोड़ा नहीं जाए। इसके अलावा ऐसे मामलों को जातीय रंग नहीं देना चाहिए। क्योंकि जातिवाद का हरियाणा में पहले ही बहुत बुरा प्रभाव है। कुछ विपक्ष के नेता जांच में प्रभाव डालने की कोशिश करते हैं। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। जिससे आगे समाज में इस तरह की घटनाएं न घटें। क्योंकि कुछ लोग ऐसे मामलों को भड़का तो देते हैं, लेकिन लोगों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं।
एफएसएल टीम ने खंगाला घर का कोना-कोना
दलित युवक की मौत का राज जानने के लिए एसआईटी के अलावा स्पेशल एफएसएल टीम का भी गठन किया गया है। रविवार को रोहतक से एफएसएल की टीम डॉ. सरोज दहिया के नेतृत्व में एसआईटी टीम के साथ पहुंची। एफएसएल की टीम ने लगभग आधे घंटे तक घर का बारीकी से निरीक्षण किया। इतना ही नहीं टीम के सदस्यों ने कमरे में बनी छोटी सी दीवार पर चढ़कर बारीकी से जांच की। जिसकी रिपोर्ट लेकर टीम रोहतक के लिए रवाना हो गई।
क्या कहते हैं अधिकारी
एसआईटी इंचार्ज अमित भाटिया ने कहा कि इस मामले की तह तक पहुंचने के लिए स्पेशल फोरेंसिक टीम का गठन किया गया है। टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया है। इस मामले से जुड़े सभी सबूत टीम द्वारा एकत्र किए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। शीघ्र ही पूरे मामले की जांच पूर्ण कर खुलासा किया जाएगा। 
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