जीटी रोड पर दंगों के दौरान महिलाओं से कथित गैंगरेप की सूचना पाकर न केवल बुधवार को जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया, बल्कि राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम भी कुराड़ गांव की खाक छानने लगी।
आते ही उन लोगों से पूछताछ की। बकौल आयोग, अभी तक ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है कि घटना हुई है। अगर कोई पीड़ित महिला है या महिलाएं हैं तो उन्हें आयोग खुद ढूंढने का प्रयास करेगा। बताया जाता है कि दो दिन से हसनपुर, कुराड़ व आसपास के एरिया में चर्चा फैल गई कि उपद्रवियों ने न केवल वाहन फूंके, बल्कि महिलाओं की अस्मत भी लूटी है।
कुछ ढाबा मालिकों के सामने महिलाओं को बस में बैठाकर भेजा गया। इससे चर्चा के बुधवार को सार्वजनिक होने से प्रशासन में हड़कंप मच गया। सुबह खुद प्रधान सचिव देवेंद्र सिंह व आईजीपी परमजीत अहलावत जीटी रोड पर पहुंचे और चर्चा से संबंधित बताए गए लोगों से पूछताछ की। पूछताछ के बाद आईजीपी परमजीत अहलावत ने कहा कि अभी तक ऐसा कुछ नहीं सामने आया है। उन्होंने खुद ग्रामीणों से लेकर ढाबा मालिकों तक से पूछताछ की है।
50 साल जीटी रोड पर किया सफर, कभी नहीं देखा ऐसा मंजर
दिल्ली से कुराड़ पहुंचे हरमेश लाल ने बताया कि वे ठेकेदारी का काम करते हैं। इसके चलते दिल्ली से बाहर आना-जाना लगा रहता है। उसे इस रोड पर सफर करते 50 साल हो गए, लेकिन ऐसा मंजर पहली बार देखा। उस रात वे पानीपत से आए थे। रास्ते में अहमदाबाद का एक युवक व युवती भी कार में सवार हो गए।
तड़के करीब ढाई-तीन बजे अचानक वाहनों को उपद्रवियों ने रोक लिया। एक-एक के करके वाहनों में आग लगा दी। जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। महिलाओं ने बचने के लिए आसपास के ढाबों में शरण ली। किसी तरह प्रशासन की टीम पहुंची और खौफजद्दा यात्रियों को बस में बैठाकर सोनीपत ले गए, वहां से दिल्ली पहुंचाया। दहशत की वह रात कभी नहीं भूल पाएंगे।
मामले की जांच की है, लेकिन दुष्कर्म के तथ्य सामने नहीं आए हैं और न ही कोई पीड़ित आगे आया है। अगर कोई पीड़ित आगे आता है तो जरूर कार्रवाई होगी।
रेखा शर्मा, सदस्य, राष्ट्रीय महिला आयोग