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Sonipat: कस्टोडियन की 3 हजार गज जमीन की करा दी रजिस्ट्री, तत्कालीन तहसीलदार समेत 11 नामजद

Sat, 13 Aug 2022 11:53 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)

सार

तहसील व नगर निगम अधिकारी के भू माफिया से गठजोड़ का मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने खुलासा किया है। कस्टोडियन की जमीन को कृषि भूमि दिखाकर बेचा है। सरकार को करीब 5 से 6 करोड़ के राजस्व का घाटा हुआ है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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हरियाणा के सोनीपत में मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने शहर में कस्टोडियन की 3 हजार गज जमीन को बेचने के मामले से पर्दा उठाया है। जमीन की खरीद-फरोख्त में तहसीलदार व नगर निगम अधिकारियों के साथ भू माफिया से गठजोड़ का भी पता लगा है। बेशकीमती कलेक्टर रेट की जमीन का कृषि भूमि दिखाकर काफी कम रेट पर रजिस्ट्री कर दी गई।

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इसमें सरकार को करीब 5 से 6 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ। पहले इस जमीन की रजिस्ट्री कृषि योग्य भूमि बताकर की गई। फिर एक माह में अलग-अलग टुकड़ों में 10 रजिस्ट्री आवासीय क्षेत्र बताकर की गई और अब तीन रजिस्ट्री कॉमर्शियल (व्यावसायिक) क्षेत्र बताकर की जा चुकी हैं। 

लॉकडाउन में इस जमीन पर पुराना कब्जा दिखाकर कुछ लोगों ने अपने नाम सेल डीड कराई थी। इस पूरे मामले में खुलासे के बाद मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने तत्कालीन तहसीलदार, नायब तहसीलदार, गिरदावर, पटवारी, निगम के सहायक अभियंता समेत 11 को नामजद किया। 
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शहर में काफी जगह कस्टोडियन की जमीन है और यह जमीन अधिकतर ऐसी जगह पर है, जहां उसकी कीमत करोड़ों में है। कस्टोडियन की जमीन की पूरी जिम्मेदारी तहसीलदार सेल्स के पास होती है, लेकिन यहां कस्टोडियन की जमीन की सेल डीड बनाकर प्राइवेट लोगों को बेच दी गई।

रोहतक रोड पर बोस्टल जेल के सामने कस्टोडियन की तीन बीघा जमीन को लेकर तीन साल पहले सामने आया था कि वहां कलेक्टर रेट के हिसाब से इसकी कीमत लगभग 5.20 करोड़ रुपये होती है तो बाजार भाव के हिसाब से इसकी कीमत करीब 17 करोड़ से अधिक है। तत्कालीन पटवारी राजेंद्र ने उस जमीन का मूल्यांकन कृषि भूमि बताकर इसका रेट 1.60 करोड़ बताया।

साथ ही बाजारी रेट के रूप में कीमत 2.30 करोड़ रुपये में बनाई गई। बाद में वह सरकारी जमीन प्राइवेट लोगों के नाम हो गई है। उस सेल डीड को यह कहकर बनाया गया है कि उस जमीन को जिन लोगों को दिया गया है, उनका जमीन पर काफी समय से कब्जा था।

वहीं तहसीलदार सेल्स के प्रतिनिधि का दावा है कि उस जमीन का आवंटन कुछ लोगों के पक्ष में किया गया है, लेकिन आवंटन के दौरान यह नहीं बताया गया कि उसका इस्तेमाल कॉमर्शियल या रेजिडेंसियल किस लिए किया जाएगा। 
 
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के सदस्य एसआई सुनील कुमार ने सिविल लाइन थाना पुलिस को बताया कि वर्तमान में 7 हिस्सों में विभाजित 3 हजार गज की जमीन बिक्री में गड़बड़ी हुई। सुनील कुमार के बयान पर तत्कालीन तहसीलदार विकास, नायब तहसीलदार बलवान, पटवारी राजेंद्र, गिरदावर सुरेश कुमार, नगर निगम के सहायक अभियंता देवेंद्र, प्रॉपर्टी डीलर हरेंद्र सैनी, रामचंद्र, मामन, सतबीर, ओमी व रणधीर को नामजद किया गया है।

आरोप है कि तहसीलदार पर अपनी देखरेख में जमीन की रजिस्ट्री कराई और एक परिवार ने कब्जा करके अपने नाम करा लिया। सिविल लाइन थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस जमीन पर हाईकोर्ट में केस लड़ा गया, जिसमें 5 अक्तूबर, 2018 को सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। उसके बाद भी आगे बेच दी गई।

अधिकारियों पर यह आरोप
तत्कालीन पटवारी राजेंद्र सिंह पर व्यावसायिक जमीन की केवल अपने रिकॉर्ड के आधार पर कृषि भूमि दिखाकर बिक्री के रेट निर्धारित करने का आरोप है। गिरदावर सुरेश कुमार पर पटवारी राजेंद्र सिंह की रिपोर्ट की पुष्टि कर अपनी रिपोर्ट देने का आरोप है। तत्कालीन तहसीलदार बिक्री विकास ने विवादित भूमि व्यावसायिक होते हुए बिना जांच पड़ताल व मौका निरीक्षण किए कृषि भूमि रेट पर बेचने के सेल्स ऑर्डर जारी किए।

तत्कालीन नायब तहसीलदार बलवान सिंह ने व्यावसायिक जमीन होते हुए और रिहायशी जमीन का एनओसी होते हुए रिकॉर्ड की अनदेखी कर व्यावसायिक भूमि की कृषि भूमि रेट पर रजिस्ट्री कर दी। नगर निगम के सहायक अभियंता देवेंद्र ने नगर निगम सोनीपत के रिकॉर्ड अनुसार उस दौरान संपत्ति कर रिकॉर्ड में विवादित जमीन व्यावसायिक, खाली प्लॉट अंकित होते हुए भी रिहायशी रेट के चार्ज लेकर एनओसी जारी की। सभी अधिकारियों संग मामले में प्रॉपर्टी डीलर हरेंद्र सैनी, रामचंद्र, मामन, सतबीर, ओमी और जागेराम पर धोखाधड़ी, गबन समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। 

यह है कस्टोडियन की जमीन 
भारत-पाक बंटवारे के समय जो लोग हिंदुस्तान छोड़कर दूसरे देश में चले गए या जो लोग दूसरे देश के नागरिक हैं। उनका कोई वारिस भी यहां नहीं है तो उसकी संपत्ति कस्टोडियन मानी जाएगी। अथवा जिस जमीन का कोई खुद को वारिस साबित नहीं कर पाता और वह सरकार के नियंत्रण में होती है। वह कस्टोडियन की जमीन में दर्ज होगी।

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