हाईकोर्ट के स्टे आर्डर के बावजूद विवादित नौ एकड़ जमीन की रजिस्ट्री करने के मामले में गिरफ्तार नायब तहसीलदार जयवीर मलिक ने अदालत में याचिका दायर की है कि एक आला अधिकारी के इशारे पर पुलिस ने रिमांड के दौरान उससे एक लाख रुपये की रिकवरी दिखाई है। जबकि वास्तव में उससे कोई रिकवरी नहीं हुई थी। मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। एसडीजेएम नरेंद्र सिंह की अदालत ने याचिका को आगामी कार्रवाई के लिए सेशन कोर्ट भेज दिया है।
एक दिन पहले अदालत में दायर याचिका में नायब तहसीलदार की तरफ से कहा गया है कि पुलिस ने उसे 13 नवंबर को गिरफ्तार किया था। उसके बाद 14 को अदालत में पेश किया। पुलिस हिरासत में मुझे छाती में दर्द हुआ तो सरकारी अस्पताल में इलाज के बाद रिमांड अवधि समाप्त होने पर दोबारा अदालत में पेश किया गया। मुझसे कोई भी पैसा बरामद नहीं हुआ है, बल्कि जेल में भेजने के एक दिन बाद मेरे घर की तलाशी ली गई तो उस दौरान मेरे परिजन, गांव के मुख्य लोग और महिला सरपंच मौजूद थी। उनके सामने कोई राशि बरामद नहीं हुई। राशि बरामद होने के मामले में गड़बड़ी है। पैसे बरामदगी का मामला भी उन्हें जेल में पता चला है। आरोपी तहसीलदार ने एसडीजेएम से मामले की जांच करवाकर न्याय की गुहार लगाई है।
इस मामले में जेल गए थे नायब तहसीलदार
नायब तहसीलदार जयवीर मलिक के पास गन्नौर का एडिशनल चार्ज था। मलिक पर उक्त विवादित जमीन में अपना निवेश करने वाले कंवलजीत ने आरोप लगाया था कि उसने जमीन के मालिक के साथ सांठगांठ कर हाईकोर्ट के स्टे आर्डर को नजरअंदाज करते हुए जमीन की रजिस्ट्री कर दी। जांच के बाद गन्नौर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नायब तहसीलदार सहित तीन को गिरफ्तार किया था।
गुमराह कर रहा आरोपी, पुलिस कहां से लाएगी पैसा : डीएसपी
गन्नौर डीएसपी सतीश शर्मा का कहना है कि रिमांड के दौरान उससे एक लाख की बरामदगी हुई है। आरोपी मामले को नया मोड़ देने के लिए गुमराह कर रहा है। पुलिस किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार है।