सोनीपत।
नगर निगम ने फरवरी 2017 में जिन लोगों को राहत देने के लिए 25 प्रतिशत छूट के साथ प्रॉपर्टी टैक्स जमा करा लिया, उन लोगों की अब परेशानी बढ़ गई है। अब उन लोगों को जमा कराए हुए टैक्स की रकम भी बिल में जोड़कर भेज दी गई है। ऐसे कोई कम लोग नहीं है, बल्कि ऐसे छह हजार लोगों को बिल भेजे गए है। लोगों को बिल ठीक करवाने के लिए नगर निगम कार्यालय में लाइन में मजबूरन खड़ा होना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि नगर निगम की लापरवाही का खामियाजा उनको भुगतना पड़ रहा है।
6 जुलाई 2015 को सरकार ने नोटिफिकेशन जारी करके सोनीपत नगर परिषद को नगर निगम का दर्जा दिया था। शहर से लगते 26 ग्राम पंचायत भी निगम में शामिल की गई थी। इसके बाद नगर निगम क्षेत्र का प्रॉपर्टी सर्वे करने के लिए फरवरी 2016 में मुख्यालय से मंजूरी लेकर मैप माई इंडिया कंपनी को 1.52 करोड़ रुपये का वर्क ऑर्डर किया गया। सर्वे के दौरान नगर निगम क्षेत्र में 1.68 लाख प्रॉपर्टी मिली। सर्वे होने के बाद नगर निगम ने पहली बार लोगों के घरों में प्रॉपर्टी टैक्स के बिल भेजे। यह बिल जमा करने के लिए सरकार की ओर से लोगों को फरवरी माह में 25 प्रतिशत छूट भी दी गई। यह छूट मिलने पर एक लाख से ज्यादा लोगों ने प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराया था।
छह हजार लोगों की एंट्री हुई डिलीट
जिन लोगों ने 25 प्रतिशत छूट के साथ प्रॉपर्टी टैक्स जमा किया था, उन सभी की एंट्री कंपनी कर्मियों ने कंप्यूटर में दर्ज की थी। कंपनी कर्मियों से छह हजार लोगों की एंट्री डिलीट हो गई और इसका ही खामियाजा इन छह हजार लोगों को भुगतना पड़ रहा है। इन छह हजार लोगों का अब दोबारा बिल भेजा गया तो उसमें वह पिछला टैक्स भी जोड़कर भेज दिया गया, जिसे वह 25 प्रतिशत छूट के साथ जमा कर चुके है। इस कारण ही इन लोगों को बिल ठीक कराने के लिए निगम कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे है और वह दिनभर लाइन में खड़े रहते है।
प्रॉपर्टी टैक्स के साथ फायर टैक्स में भी कर दी छूट
सरकार की ओर से फरवरी में केवल प्रॉपर्टी टैक्स में लोगों को 25 प्रतिशत की छूट दी गई थी। उस समय नगर निगम के कर्मियों ने इतनी लापरवाही बरती कि प्रॉपर्टी टैक्स के साथ-साथ फायर टैक्स में भी 25 प्रतिशत की छूट दे डाली। उस समय हुई लापरवाही का खामियाजा आज निगम क्षेत्र की जनता को भुगतना पड़ रहा है। फायर टैक्स में दी गई छूट के रुपये को वापस लेने के लिए नगर निगम ने बिल बढ़ाकर भेज दिए है।
सॉफ्टवेयर से पिछले प्रॉपर्टी टैक्स के बिलों की इंट्री गलत हो गई थी, जिसके चलते लोगों के पास ज्यादा राशि के बिल भेजे गए है। जिन्हें ठीक करने के लिए कर शाखा में स्टाफ बैठाया गया है। लोगों को किसी भी परेशानी का सामना नहीं पड़ेगा।
- डॉ. सुशील मलिक, कमिश्नर नगर निगम