अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सुशील कुमार गर्ग की अदालत ने जमीन की पैमाइश के नाम पर पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगने के मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी गिरदावर और पटवारी को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोनों को चार-चार साल की कैद और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर छह-छह माह अतिरिक्त कैद सजा भुगतनी होगी।
गांव दीपालपुर निवासी किसान विजय ने विजिलेंस को शिकायत दी थी कि उसे अपने खेत की पैमाइश करवानी थी। जब उसने पटवारी सुनील से संपर्क किया तो उसने पांच हजार रुपये की मांग की। उसने बताया था कि इसमें से गिरदावर को भी हिस्सा दिया जाएगा। इस पर विजय ने इसकी शिकायत विजिलेंस से कर दी। इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई थी। तत्कालीन निरीक्षक ओमप्रकाश के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया था। इसके लिए तत्कालीन बीडीपीओ राजेश को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया। टीम ने विजय को पांच हजार रुपये देकर भेज दिया। विजय ने सात जुलाई, 2015 पैमाइश के नाम पर पटवारी सुनील और गिरदावर बलवान सिंह को पैसे थमाए। इस पर विजिलेंस की टीम ने उन्हें काबू कर लिया था। टीम ने गिरदावर बलवान से दो हजार और पटवारी सुनील से तीन हजार रुपये बरामद कर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था।