अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। राई औद्योगिक क्षेत्र में स्थित रीयल पेंट फैक्टरी में आग लगने से पांच जिंदगियां जिंदा जलीं तो प्रशासन और अन्य विभागों के अधिकारी जांच के लिए जागे। जबकि 10 साल से नियमों की धज्जियां उड़ाकर यह फैक्टरी चल रही थी। इस दौरान किसी जिम्मेदार विभाग के अधिकारी ने निरीक्षण करने की जरूरत भी नहीं समझी। यही वजह है कि फैक्टरी संचालक और अधिकारियों की लापरवाही के चलते आग में जलकर मरने वाले और घायल कर्मियों का रिकॉर्ड न पीएफ, न ईएसआई श्रम विभाग के पास है। इससे साफ हो गया है कि इनमें किसी भी कर्मी का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया था। यह जरूर है कि जिस तरह से फैक्टरी में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था, उसके लिए इंडस्ट्रीज हेल्थ एंड सेफ्टी विभाग, श्रम विभाग, एचएसआईआईडीसी के अफसर ही पूरी तरह से जिम्मेदार है।
इंडस्ट्रीज हेल्थ एंड सेफ्टी विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है कि वह फैक्टरियों के अंदर श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर कराए और फैक्टरी में किसी तरह का हादसा नहीं हो सके, उसका भी ध्यान रखा जाए। श्रम विभाग को सुनिश्चित करना होता है कि फैक्टरी में कितने कर्मी काम कर रहे है और उनको पूरा हक मिल रहा है या नहीं। उनका श्रम विभाग, ईएसआई, पीएम विभाग में रजिस्ट्रेशन कराया गया है या नहीं, जिससे किसी तरह की घटना होने पर उनकी हर संभव मदद हो सके। इस तरह एचएसआईआईडीसी के अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है कि वह फैक्टरी में किसी तरह का अनाधिकृत निर्माण नहीं होने दे और यह भी सुनिश्चित करें कि फैक्टरी में ऐसा कोई निर्माण नहीं किया गया हो, जिससे वहां हादसा होने की आशंका हो। इसमें फायर ब्रिगेड विभाग की जिम्मेदारी भी तय होती है कि वह फायर उपकरणों की हर साल जांच करें। इन सभी विभागों के अधिकारियों की अब बड़ी लापरवाही सामने आई है, क्योंकि किसी भी विभाग के अधिकारी ने आजतक वहां फैक्टरी में जाकर यह नहीं देखा कि नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। अब फैक्टरी में आग लगने पर जिंदगी जलने के बाद जरूर यह सभी विभागों के अधिकारी जांच के नाम पर दौड़ लगा रहे है। यह विभागों के अधिकारी ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारी भी कभी इस तरफ ध्यान नहीं देते थे और अब वह भी जांच कराने में लगे हुए है। लेकिन जिस तरह नियमों को ताक पर फैक्टरी चलाई जा रही थी, उसके लिए पूरी तरह से अधिकारी ही जिम्मेदार है।
पेंट व केमिकल बनाने जैसी फैक्टरियों में यह नियम जरूरी
-फैक्टरी में आगे की ओर खाली जगह छोड़ी जाए और उसे किसी भी तरह से कवर नहीं किया जाए।
-फैक्टरी के अंदर से बाहर निकलने के लिए दो गेट होने जरूरी।
-फैक्टरी में किसी भी तरह से रिहायशी कमरे का निर्माण नहीं होना चाहिए।
-फैक्टरी के अंदर पेंट, कैमिकल या अन्य ज्वलनशील पदार्थों को अलग से एक जगह गोदाम में रखा जाए।
-फैक्टरी में काम करने वाले कर्मियों का पूरा रिकार्ड पीएफ, ईएसआई व श्रम विभाग में होना चाहिए तो उनको रोजाना के बेस पर अंदर काम करने का परमिट मिलना चाहिए।
-फैक्टरी के अंदर रात के समय कोई भी कर्मचारी नहीं रुकना चाहिए, केवल गेट पर बाहर की ओर गार्ड रह सकता है।
-वायरिंग व तार पूरी तरह से शॉर्ट सर्किट प्रूफ होना चाहिए।
-फायर सेफ्टी उपकरण की हर महीने जांच होनी चाहिए।
डीसी ने तलब किया पूरा रिकार्ड, सेफ्टी विभाग ने भी रिपोर्ट भेजी मुख्यालय
पेंट फैक्टरी में आग लगने से इतना बड़ा हादसा होने के बाद डीसी केएम पांडुरंग ने एचएसआईआईडीसी के एस्टेट ऑफिसर कुलदीप कादियान से पूरा रिकार्ड तलब किया। जिसके बाद डीसी को रिकार्ड भेज दिया गया है, जिसमें बताया गया है कि कब फैक्टरी के लिए प्लॉट अलॉट किया गया। कब फैक्टरी शुरू की गई तो उसमें कितने कर्मचारी काम करने की बात बताई गई थी। फैक्टरी में केवल 14 कर्मचारी काम करने की बात बताई गई थी और उनमें भी मैनेजर व सुपरवाइजर आदि को कर्मी दिखाया गया था। इसके अलावा इंडस्ट्रीज हेल्थ एंड सेफ्टी विभाग की ओर से पूरी रिपोर्ट तैयार करके अपने मुख्यालय में पंचकूला भेजी गई है, जिसमें फैक्टरी के अंदर नियमों का पालन नहीं होने की बात लिखी गई है।