कानून को ताक पर रख कर हो रहा यमुना में मशीनों से रेत खनन
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। सरकार भले ही नदियों को बचाने का दावा करती है और उसके लिए करोड़ों रुपये का बजट भी जारी किया जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि मशीनों से रेत खनन करके यमुना का सीना चीरा जा रहा है। जैनपुर टिकौला के पास यमुना में रात के समय मशीनों से खनन करके पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया गया है और वहां गहरे कुंड बना दिए गए है। इस तरह एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के मशीनों से खनन नहीं करने की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। खनन विभाग के नियमों की भी खूब अनदेखी हो रही है और यमुना की बाढ़ को रोकने के लिए बनाई गई ठोकरों के पास ही मशीनों से खनन किया जा रहा है। जिससे बाढ़ आने पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। इतना कुछ होने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी व खनन विभाग पूरी तरह से आंख बंद किए हुए है और उसे यमुना में मशीनों से खनन होता नहीं दिख रहा है।
नदियों में होने वाले रेत खनन से बिगड़ते पर्यावरण संतुलन को देखते हुए एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश है कि किसी भी जगह मशीनों से खनन नहीं किया जाएगा। लेकिन जैनपुर टिकौला में रात में लगभग दस बजे कई मशीनों को यमुना में उतार दिया जाता है और वहां सुबह के दस बजे तक खनन किया जाता है। इस तरह खुलेआम सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। वहां पॉकलेन और जेसीबी से रेत खनन करके यमुना का सीना चीरा जा रहा है। इससे साफ पता चलता है कि सरकार से लेकर खनन विभाग के अधिकारी भले ही मशीनों से खनन नहीं होने का दावा करते हो, लेकिन उनकी पोल जैनपुर टिकौला में खुल जाती है। बड़ौली के लोगों ने बताया कि वहां मशीनों से खनन अभी नहीं किया जा रहा है, बल्कि पिछले कई महीने से रात के समय लगातार मशीनों को यमुना में उतारकर खनन किया जाता है। जिसमें नियम व कानून सभी को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। यमुना में जिस जगह पर मशीनों से खनन किया जा रहा है, उस रास्ते पर पहले ही दबंगों को बैठा दिया जाता है और यमुना के पास किसी को नहीं जाने दिया जाता है। वहां केवल वह ट्रक चालक जा सकते है, जिनको रेत भरवाना होगा।
यमुना में बना दिए गए कुंड
यमुना में पानी आने पर ग्रामीण नहाने के लिए जाते है, जिससे उनकी डूबकर मौत हो जाती है। जैनपुर टिकौला व मिमारपुर के पास पिछले साल भी कई लोगों की डूबकर मौत हो गई थी। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यमुना में खनन करके 10-15 फुट तक गहरे कुंड बना दिए जाते है। जब यमुना में पानी आता है तो वह कुंड दिखाई नहीं देते है और वहां नहाने जाने वाले उस कुंड में डूब जाते है, जिससे उसकी मौत हो जाती है। इसको लेकर कई बार काफी हंगामा भी हुआ, लेकिन उसके बावजूद मशीनों से खनन किया जा रहा है।
यह है रेत खनन करने के नियम
खनन विभाग के अधिकारियों ने जब खनन करने के नियमों के बारे में बताया तो उससे साफ हो गया कि किस तरह से नियम व कानूनों को ताक पर रखकर खनन का खेल किया जा रहा है। जिला खनन अधिकारी के अनुसार किसी भी जगह जेसीबी या पॉकलैन मशीन से खनन नहीं किया जा सकता है और ऐसा करना पूरी तरह अवैध है। इसके अलावा नदी में 3 मीटर गहराई तक खनन किया जा सकता है। यह खनन भी नदी में ठोकर से 15 फुट अंदर करना होता है, जिससे नदी में ज्यादा पानी आने से ठोकर कमजोर होने पर कोई नुकसान नहीं हो। लेकिन जैनपुर टिकौला में ठोकर के पास ही खनन किया जा रहा है और ठोकर के पास से बिना अनुमति के रास्ता बनाकर रेत से भरे ट्रकों को दौड़ाया जा रहा है।
यमुना में किसी भी जगह मशीनों से खनन नहीं किया जा सकता है। किसी जगह मशीन से खनन किया जा रहा है तो वह पूरी तरह से गलत है। इसके लिए सख्त निर्देश दिए गए है कि यमुना में मशीनों से खनन न हो सके। अगर किसी जगह रात के समय मशीनों को उतारकर इस तरह से खनन किया जा रहा है तो उसमें कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसा करने वाले किसी को भी नहीं छोड़ा जाएगा और खनन विभाग के अधिकारियों से छापेमारी कराई जाएगी।
केएम पांडुरंग, डीसी