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सामूहिक दुष्कर्म के मामले में कोर्ट में बयान बदलने वाली एलएलबी की छात्रा को तीन साल कैद

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सामूहिक दुष्कर्म मामले में कोर्ट में बयान बदलने पर छात्रा को तीन साल की कैद
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। एसीजेएम निशांत शर्मा की अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में कोर्ट में बयान बदलने वाली छात्रा को सुनवाई के बाद दोषी करार दिया है। अदालत ने छात्रा को तीन साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर छह माह की अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी। छात्रा के कोर्ट में बयान बदलने पर कोर्ट के निर्देश पर धारा 193 के तहत कार्रवाई की गई थी। जिसमें अब यह फैसला सुनाया गया है।
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सोनीपत के एक विवि में एलएलबी की छात्रा का अपहरण कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला 2012 में दर्ज किया गया था। दिल्ली के एक गांव की रहने वाली छात्रा ने 18 मई, 2012 को पुलिस को बताया था कि वह विवि के छात्रावास में रहती है। 16 मई, 2012 की दोपहर वह विभागाध्यक्ष से अनुमति लेकर विश्वविद्यालय के गेट के बाहर किताब लेने आई थी। इस दौरान स्कॉर्पियो में तीन युवक उसे जबरन उठाकर खेतों में सुनसान स्थान पर ले गए थे। वहां एक अन्य युवक मिला था। चारों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। बाद में युवक उसे विश्वविद्यालय के बाहर छोड़ कर फरार हो गए थे। मामले में 18 मई, 2012 को सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया था। जिसमें बाद में तत्कालीन एडीजे मनीषा बत्रा की अदालत में सुनवाई हुई थी। जहां छात्रा ने अपने बयान बदल दिए थे, उसने पहले दर्ज कराए 164 के बयान में दुष्कर्म किए जाने की बात कही थी। वहीं उसने बयान बदलने के साथ ही आरोपियों को पहचाने से इंकार कर दिया था। उसके बावजूद एक युवक के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने के कारण उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी और अन्य तीन दोषमुक्त हो गए थे। वहीं छात्रा के बयान बदलने के कारण एडीजे मनीषा बत्रा की कोर्ट ने छात्रा के खिलाफ धारा 193 के तहत केस चलाने के लिए एसीजेएम कोर्ट में मामला भेज दिया था। जिसमें 30 मई, 2013 से इस मामले की सुनवाई चल रही थी। मामले में सुनवाई के बाद अब एसीजेएम निशांत शर्मा की कोर्ट ने छात्रा को दोषी करार देते हुए तीन साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देेने पर छह माह अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी।
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