सोनीपत। यमुना में खनन को लेकर फिर से आरोप लगने लगे हैं। खनन कंपनियों के साथ ही अधिकारियों पर भी आरोप लगाए जा रहे हैं।
आरोप है कि सरकार के करीब 60 करोड़ रुपये दबाकर बैठे तीन खनन ठेकेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। ठेकेदारों को करीब दो माह पहले खनन विभाग की तरफ से नोटिस भेजा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब इसकी शिकायत स्टेट विजिलेंस ब्यूरो में भेजी गई है।
सरकार ने यमुना में खनन करने के लिए वर्ष 2015 में पट्टे आवंटित किए थे। जिसके एक साल बाद ही बुलडोजर व पोकलेन से खनन करने पर कोर्ट ने रोक लगा दी थी। जिससे कई जगह खनन बंद कर दिया गया और बुलडोजर से खनन पर रोक लगाए जाने के बाद कई ठेकेदारों ने हर महीने की पट्टे की किस्त जमा करानी बंद कर दी थी। उस समय प्रशासन ने खनन ठेकेदारों पर शिकंजा कस दिया और खनन को बंद करा दिया गया, लेकिन उस समय खनन ठेकेदारों पर करोड़ों रुपये बकाया रह गया था और वह जमा नहीं करके खान को सरेंडर भी कर दिया गया था। बाद में कुछ ठेकेदारों ने कुल रकम का मामूली हिस्सा जमा करवाकर फिर से खनन अधिकार हासिल कर लिए थे। अब एक बार फिर खनन ठेकेदारों ने खनन का काम शुरू कर दिया है। इसी बीच सामने आया है कि 3 खनन कंपनियां ऐसी हैं, जिन्होंने बकाया नोटिस के बावजूद निर्धारित रकम जमा नहीं करवाई जबकि खनन धड़ल्ले से जारी है। इनमें तीन कंपनियों पर 21 करोड़, 19 करोड़ व 20 करोड़ रुपये बकाया है। इन कंपनियों द्वारा मासिक किस्त भी समय पर जमा नहीं करवाई जा रही, जिसके कारण अब शिकायत स्टेट विजिलेंस ब्यूरो में दी गई है।
पूरी राशि जमा नहीं कराने के बताए कई कारण
खनन कंपनियों ने पूरी राशि जमा न करवाए जाने के कई कारण बताए हैं। सबसे अधिक विवाद अलॉट की गई भूमि को लेकर है। मसलन, किसी कंपनी को खनन के लिए यमुना क्षेत्र में 50 एकड़ भूमि अलॉट की गई है तो वह कंपनी खनन केवल 20 एकड़ में ही कर रही है। कंपनी का कहना है कि वह बाकी 30 एकड़ की पट्टा राशि क्यों जमा करवाएं। इस मामले को लेकर ठेकेदार अदालत में भी गए हैं। इसके अलावा मौसम के कारण साल भर में अधिकतर समय खनन बंद होने के बावजूद उस समय की किस्त भरनी पड़ती हैं।
माइनिंग कंपनियों को बकाया राशि जमा करवाने के नोटिस भेजे गए थे। इसके बाद कुछ राशि जमा करवाई गई है, लेकिन बकाया राशि का बड़ा हिस्सा अभी भी जमा नहीं हुआ है। करीब 60 करोड़ रुपए तीनों कंपनियों पर बकाया है। किस्तों की रकम को लेकर विवाद भी है, जिसको लेकर ठेकेदार अदालत में भी गए थे। राशि जमा कराने को लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
अशोक कुमार, खनन अधिकारी, सोनीपत