सोनीपत। बाढ़ के बाद खेतों में आई रेत के आकलन के लिए जिला प्रशासन की ओर से कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में जिला खनन अधिकारी, नायब तहसीलदार, पटवारी व कानूनगो को शामिल किया गया है। चार सदस्यीय कमेटी यमुना नदी के उफान से प्रभावित खेतों का जायजा लेगी। इसके बाद अपनी रिपोर्ट तैयार करके सरकार को सौंपेगी।
हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी से यमुना क्षेत्र में करीब 25 गांवों की 8 हजार एकड़ से ज्यादा फसल बर्बाद हुई। यमुना की बाढ़ के कारण हुए कटाव ने तो बाग तक नहीं छोड़े। बागों में लगे फलदार पेड़ भी यमुना के पानी में बह गए। जलस्तर कम हुए एक माह बीत चुका है। खेतों में आई रेत के कारण किसान अपनी फसल उगा पाने में असमर्थ हैं। जिसके चलते किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की बढ़ती समस्या को देखते हुए सरकार ने अधिकारियों को बाढ़ के बाद खेतों में आई रेती का आकलन करके रिपोर्ट देने के आदेश जारी किए है। इसको देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी जल्द नदी के उफान से प्रभावित हुए खेतों का जायजा लेकर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
यमुना में बाढ़ के बाद खेतों में आई रेत के आकलन के लिए सरकार के आदेश पर कमेटी का गठन कर दिया है। यह कमेटी खेतों में जाकर रेत का आकलन करेगी। जल्द रिपोर्ट तैयार करके सरकार को सौंपी जाएगी। -हरिओम अत्री, जिला राजस्व अधिकारी, सोनीपत।