सोनीपत में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि दिल्ली सरकार ने यमुना की स्थिति को बिगाड़ रखा था। यमुना की जो स्थिति दिल्ली ने बना रखी थी उसकी जांच कराएंगे। वह केवल आईटीओ बैराज की ही नहीं बल्कि दिल्ली में पूरे यमुना क्षेत्र की जांच करवाएंगे। दिल्ली सरकार की लापरवाही के कारण यमुना की स्थिति बिगड़ी है।
इससे जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा है। वह पांच साल तक सोए रहे और अब दिल्ली में पानी भरा तो अपनी नाकामी हरियाणा पर डाल रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल रविवार को सोनीपत में खरखौदा व मुरथल में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
इससे पहले उन्होंने खरखौदा के कन्या कॉलेज में अदम्य साहस से दुश्मन के छक्के छुड़ाने वाले कर्नल होशियार सिंह व गुरु के लिए अपना शीश काट कर देने वाले दादा कुशाल सिंह दहिया की प्रतिमाओं का अनावरण किया। इसके बाद मुख्यमंत्री मुरथल के दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय में पहुंचे और यहां आइडिया लैब को लोकार्पित किया। साथ ही विवि परिसर में 135 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज का आरोहण किया।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि दिल्ली सरकार ने यमुना को लेकर बहुत ज्यादा लापरवाही बरती है। एक समय में यमुना के अंदर से सात लाख क्यूसेक पानी भी आसानी से गुजार दिया जाता था और इस बार महज साढ़े तीन लाख क्यूसेक पानी से ही पूरी दिल्ली में जलभराव हो गया। इसके लिए सीधे तौर पर दिल्ली सरकार जिम्मेदार है।
दिल्ली सरकार ने पांच साल में कभी यमुना के हालातों की ओर ध्यान ही नहीं दिया। वह पांच साल सोए रहे और जब पानी भर गया तो वह हरियाणा पर अपनी नाकामी डाल रहे हैं। ड्रेन नंबर आठ के रास्ते यमुना में पानी जाता है। कई बार कहने के बाद इसकी सफाई कराई गई। जिसमें 30 हजार टन मलबा निकला। दिल्ली के एलजी ने स्वयं इसकी सफाई कराई।
आईटीओ का ब्रिज दिल्ली क्षेत्र में है। अगर वहां स्थिति खराब लग रही थी तो उनकी भी जिम्मेदारी थी कि वह आगाह करते। वर्ष 2018 से दिल्ली सरकार ने आईटीओ ब्रिज की देखरेख के लिए कोई खर्च नहीं दिया है। पहले इंद्रप्रस्थ पावर प्लांट की तरफ से पैसा दिया जाता था। उसके बंद होने के बाद यह दिल्ली सरकार की जिम्मेदारी थी। उसे पूरा नहीं किया।
मुख्यमंत्री ने भूपेंद्र हुड्डा के सवालों के जवाब में कहा कि वह इस तरह से बात कर रहे हैं जैसे उनके समय में कोई आपदा ही नहीं आई हो। उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि आपदा प्रबंधन को लेकर उनके समय में साल में केवल एक बार बैठक होती थी और वह पल्ला झाड़ लेते थे, जबकि वर्तमान सरकार में दो बार बैठक होती है। इंतजामों पर इस बार भी बाढ़ राहत के लिए 800 करोड़ के प्रोजेक्ट शुरू किए थे।
उन्होंने कहा कि इस बार अचानक तेज बारिश व यमुना में अधिक पानी आने से हालात खराब हुए। पानी का सैलाब आता है तो बाढ़ के हालात होते हैं, लेकिन लगातार राहत कार्य जारी है। बाढ़ की स्थिति से करीब 13 सौ गांव प्रभावित हैं। करीब 6 हजार लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। अब पानी उतर रहा है, जिससे राहत है। इस दौरान सांसद रमेश कौशिक, राई विधायक मोहन लाल बडौली, गन्नौर विधायक निर्मल चौधरी, पूर्व मंत्री कविता जैन आदि मौजूद रहे।