उद्योगों में जारी बिजली संकट को लेकर नाराज उद्योगपतियों ने वीरवार को विरोध स्वरूप फैक्टरियों पर काले झंडे लगाए। बिजली किल्लत, एनजीटी के निर्देश व पीएनजी जैसे मुद्दों पर नाराज उद्योगपतियों ने वीरवार को बैठक कर सरकार के खिलाफ आरपार की लड़ाई लड़ने का फैसला किया है।
उद्योगपतियों ने कहा कि मांगें पूरी होने तक वे अपने उद्योगों पर काले झंडे लगाकर अपना विरोध प्रकट करेंगे। बैठक में उद्योगपतियों ने इस बार काली दिवाली मनाने का भी एलान किया। बैठक के दौरान उद्योगपतियों ने 15 सदस्यीय कमेटी गठित की, जो आंदोलन की आगामी रणनीति तैयार करेगी। साथ ही उद्योगपतियों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का भी काम करेगी। इस दौरान निर्णय लिया गया कि 50 हजार से अधिक लोगों के हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के अलावा केंद्रीय उद्योग मंत्री को भेजा जाएगा।
उद्योगपतियों ने बताया कि राई, कुंडली, बड़ी, मुरथल औद्योगिक क्षेत्रों में करीब दो माह से बिजली संकट गहराया हुआ है। बिजली निगम के अधिकारी समस्या को दूर करने का आश्वासन तो दे रहे हैं, लेकिन धरातल पर बेहद धीमी गति से काम हो रहा है। यही कारण है कि दीपालपुर बिजली घर के खराब ट्रांसफार्मर को दो माह बाद भी ठीक नहीं किया जा सका है। इस ट्रांसफार्मर के खराब होने से उद्योगों में रोजाना करीब 6 से 8 घंटे तक बिजली कट लग रहे हैं। जिसका खामियाजा उद्योगपतियों को भुगतना पड़ रहा है।
उद्योगपतियों ने कहा कि 15 सितंबर को उद्योगपतियों ने बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता (एसई) संदीप जैन से मुलाकात की थी। एसई ने दीपालपुर बिजली घर के खराब ट्रांसफार्मर को ठीक करने के लिए 15 दिनों का समय मांगा था। उद्योगपतियों ने चेतावनी दी थी कि यदि 30 सितंबर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो बड़ा आंदोलन करने पर विवश होंगे। 30 सितंबर के बाद भी ट्रांसफार्मर को ठीक नहीं किया जा सका। जिसके बाद उन्हें मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। उद्योगपतियों ने राई औद्योगिक क्षेत्र में एकत्रित होकर काले झंडे लेकर प्रदर्शन किया। साथ ही फैक्टरियों के बाहर भी काले झंडे लगाए। उद्योगपतियों का कहना है कि जब तक बिजली संकट का समाधान नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
पीएनजी की आपूर्ति भी पर्याप्त नहीं
उद्योगपतियों ने कहा कि क्षेत्र में पहले से बिजली संकट गहराया हुआ है। यही नहीं पीएनजी की आपूर्ति भी पर्याप्त नहीं है। ऐसे में एनजीटी की तरफ से परंपरागत जनरेटरों पर रोक लगाना अव्यवहारिक है। बिजली किल्लत के बाद पर्याप्त पीएनजी नहीं मिलने पर उन्हें अपने उद्योग बंद ही करने पड़ेंगे। उद्योगपतियों ने उद्योगों में पीएनजी की पर्याप्त आपूर्ति होने तक एनजीटी को अपने आदेश वापस लेने की मांग की।
गठित कमेटी करेगी समस्याओं का समाधान
राई मैन्युफैक्चरिंग औद्योगिक एसोसिएशन के प्रधान राकेश देवगन ने कहा कि उद्योगों पर गहराए संकट को देखते हुए सभी एसोसिएशन ने वीरवार को बैठक की। जिसमें सभी ने मिलकर 15 सदस्यीय कमेटी गठित की है। आगामी आंदोलन को लेकर जो भी फैसले लेने होंगे, वह कमेटी ही लेगी। साथ ही उद्योगपतियों की समस्याओं का समाधान करने के लिए इनकी बात सरकार तक पहुंचाएगी। 15 सदस्यीय कमेटी में राकेश देवगन, परमहंस सोलंकी, अरविंद मनचंदा, परमिंदर जैन, बसंत कोहली, राजेश दहिया, नरेंद्र कुमार, सुनील बर्क, दीपक सिंगला, सन्नी जैन को शामिल किया गया है।
उद्योगपतियों ने थाना बड़ी से एचएसआईआईडीसी कार्यालय तक निकाला जुलूस
गन्नौर। कोयला के बॉयलर व डीजल के जनरेटर का प्रयोग बंद करने के आदेशों के खिलाफ वीरवार को बड़ी औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगपतियों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उद्यमियों व श्रमिकों ने बड़ी इंडस्ट्रियल मेन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के बैनर तले सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उद्योगपतियों व श्रमिकों ने सरकार विरोधी नारे लगाते हुए कानूनों को जल्द वापस लेने की मांग की। उद्योगपतियों ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर इस कानून में संशोधन नहीं किया गया तो उनकी फैक्टरियां बंद रहेंगी और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
वीरवार को उद्योगपति के साथ श्रमिक बड़ी थाना के सामने एकत्रित हुए। यहां से हाथों में बैनर लेकर सरकार विरोधी नारे लगाते हुए एचएसआईआईडीसी बड़ी कार्यालय पहुंचे। कार्यालय में किसी भी अधिकारी के उपस्थित न होने कारण बिना ज्ञापन दिए वापस लौट गए। इस दौरान नरेंद्र नंदा, सुनील बब्बर, विनोद जैन, संजय चिल्ली, राजेंद्र सिंघला, निर्मल बंसल, रोहित आनंद, पंकज अग्रवाल सहित अन्य मौजूद रहे।
पहले बिजली व्यवस्था सुदृढ़ करे सरकार
एसोसिएशन के प्रधान अमित गोयल ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र बड़ी में करीब 130 से ज्यादा फैक्टरियां हैं, जो नए कानून से प्रभावित हो गई हैं। एनसीआर में जनरेटर चलाने पर पाबंदी लगाई गई है, लेकिन बिजली के अघोषित कटों से उद्योगपति परेशान हैं। कुछ फैक्ट्रियां ऐसी हैं, जिनमें काम करते समय अगर बिजली बंद हो जाती है तो वहां लाखों रुपयों का सामान बर्बाद हो जाता है। ऐसे समय में जनरेटर उनके लिए बेहद जरूरी है। सरकार पहले अपनी बिजली व्यवस्था सुदृढ़ करे।
समय पर भरते हैं टैक्स, फिर भी थोपे जा रहे कानून
उद्योगपति विरेंद्र जैन व श्रवण झांब ने कहा कि बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में पीएनजी पाइपलाइन का काम पूरा नहीं हुआ है। कुछ छोटे उद्योगपति यह कनेक्शन लेने में असमर्थ हैं। उद्योगपति सरकार को समय पर टैक्स चुकाते हैं, इसके बावजूद भी उन पर ऐसे कानून थोपे जाते हैं। फैक्टरियां नहीं चलेंगी तो न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा, बल्कि लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। सरकार को ग्रेप कानून में उद्योगपतियों को छूट दिलवानी चाहिए ताकि उद्योगों के साथ लोगों को बेरोजगार होने से बचाया जा सके।
राई औद्योगिक क्षेत्र में बैठक के दौरान विरोध स्वरूप काले झंडे दिखाते राई मैन्युफैक्चरिंग औद्यो?- फोटो : Sonipat