सोनीपत। स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रदेश में 5 से 17 जून तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का आयोजन किया जाएगा। दस्त से होने वाली शिशु मृत्यु दर को शून्य करने के उद्देश्य से पखवाड़े का आयोजन किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक की ओर से पखवाड़े को लेकर गाइडलाइन जारी की गई है। इसके तहत एएनएम व आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों का स्वास्थ्य जांचेंगी। साथ ही उनके परिजनों को डायरिया के बचाने के लिए जागरूक करेंगी। इसी दौरान वह ओआरएस के पैकेट व जिंक की गोलियां उपलब्ध करवाएंगी।
0 से 5 वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर शून्य रखने व उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़े की शुरुआत हो रही है। इस आयु वर्ग में लगभग 10 फीसदी मृत्यु दस्त व उसकी जटिलताओं की वजह से होती है। पखवाड़े के दौरान गांव, शहर व जिला स्तर पर स्वच्छता के लिए गहन समुदाय जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। एएनएम, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में 0 से 5 वर्ष के बच्चों वाले घरों में ओआरएस के पैकेट व जिंक की गोलियां के पैकेट का वितरण करेंगी। साथ ही बच्चों के एएनएम व आशा कार्यकर्ता परिजनों को ओआरएस घोल तैयार करने की विधि प्रदर्शन के साथ खान-पान और स्वच्छता संबंधी परामर्श देंगी। स्वास्थ्य संस्थाओं में ओआरएस, जिंक काॅर्नर स्थापित किए जाएंगे।
पखवाड़े के दौरान आशा कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में डोर टू डोर भ्रमण कर माइक्रो प्लान तैयार करेंगी। जिसमें पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की सूची बनाई जाएगी। जिले के कुछ विशेष क्षेत्र इनमें ईंट भट्ठे, निर्माण स्थल, स्लम बस्तियाें में अभियान को लेकर विशेष बल दिया गया है। जहां लोगों को बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए हाथों की सफाई व हाथ धोने के तरीके को भी बताना होगा। जिंक का उपयोग दस्त होने के दौरान बच्चों को आवश्यक रूप से कराया जाए। दस्त बंद हो जाने के बाद भी जिंक की खुराक 5 वर्ष तक बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार 14 दिन तक जारी रखी जाए। महिलाएं दस्त के समय और दस्त के बाद भी उम्र के हिसाब से बच्चों को स्तनपान और ऊपरी आहार देते रहें।
वर्जन
ओआरएस और जिंक की गोलियों के प्रयोग द्वारा शरीर में जल की कमी पूरी करने व बच्चों को भोजन में पर्याप्त पोषक तत्व देकर मृत्यु दर को रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य को लेकर सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़े की शुरुआत हो रही है। -डॉ. नीरज यादव, उप सिविल सर्जन, सोनीपत