सोनीपत। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी पर्व मनाया जाता है। इस दिन दस दिवसीय गणपति महोत्सव व पूजा-अर्चना के बाद उनकी प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी पर विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी व श्रीहरि विष्णु जी की भी पूजा का विशेष महत्व है। व्रत व पूजा-अर्चना करने से धन-धान्य व संपत्ति में वृद्धि होती है। अनंत चतुर्दशी को अनंत चौदस भी कहा जाता है।
श्री देवी चिट्टाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक व नरेंद्र नगर स्थित शिव मंदिर के आचार्य मनमोहन मिश्रा ने बताया कि चतुर्दशी तिथि 16 सितंबर को दोपहर 3:10 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 17 सितंबर को दोपहर 12:44 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार 17 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर्व मनाया जाएगा। अनंत चतुर्दशी के दिन प्रथम पूजनीय विघ्नहर्ता भगवान गणेश के अलावा भगवान विष्णु जी के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। श्रद्धालु पूजा-अर्चना के बाद दाएं हाथ में 14 गांठ वाला अनंत धागा या रक्षा सूत्र बांध सकते हैं। इन 14 गांठों को 14 लोक के साथ जोड़कर देखा गया है। इस आराधना को अनंत फल देने वाला माना गया है।
अनंत चतुर्थी की पूजा में 14 अंक का विशेष महत्व
पंडित अमित शौनक व आचार्य मनमोहन मिश्रा ने बताया कि अनंत चतुर्थी की पूजा में 14 अंक का भी विशेष महत्व है। पूजा-अर्चना के दौरान 14 फल, फूल, सूखे मेवे व विभिन्न प्रकार के पत्ते श्रीहरि को अर्पित करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। व्रत रखने से गुरु ग्रह के अशुभ प्रभाव से राहत मिलती है। भगवान विष्णु को प्रसाद के रूप में मिठाई के अलावा चने की दाल भी अर्पित कर सकते हैं। साथ ही इस दिन भगवान गजानन के साथ विष्णु, शेषनाग व माता यमुना की आराधना करने से विवाहित लोगों के विवाह संबंधी बाधा दूर होती है।
अनंत चतुर्दशी पर शुभ मुहूर्त व शुभ योग
अनंत चतुर्दशी के दिन 17 सितंबर को रवि योग का निर्माण होने के साथ भद्रा का साया भी रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा। साथ ही भाद्रपद नक्षत्र योग बनने से शुभ कार्यों की शुरुआत करना अति फलदायी रहेगा। नक्षत्र योग सूर्योदय से प्रारंभ होकर रात 1:48 बजे तक रहेगा। रवि योग सुबह 6:07 से दोपहर 1:53 बजे तक रहेगा। दोनों योग में भगवान विष्णु की आराधना से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। वहीं, भद्राकाल का साया सुबह 11:44 से रात 9:55 बजे तक रहेगा।