सोनीपत। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी), मुरथल में धरनारत शोधार्थियों की समस्याओं का हल नहीं हो पा रहा है।
विश्वविद्यालय प्रबंधन के साथ शोधार्थियों की बैठक भी बेनतीजा रही। हालांकि वार्ता में शोधार्थियों की कुछ मांगों को कमेटी बनाकर पूरा करने का वायदा किया गया है। शोधार्थियों का आरोप है कि बैठक में गैर कानूनी तरीके से नियुक्त किए गए अधिकारियों को शामिल किया गया है। यही कारण है बैठक किसी नतीजे तक नहीं पहुंची।
शोधार्थियों का कहना है कि बैठक में किए गए वायदे पहले भी किए जा चुके हैं और कई कमेटियां भी बनाई गई हैं, लेकिन मांगे आज तक पूरी नहीं की गई। सबसे मुख्य मांग वेब ऑफ साइंस के पेपर की अनिवार्यता को खत्म करना और चीफ वार्डन को बर्खास्त करने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया गया। ह्यूमेनिटीज के लिए वेब ऑफ साइंस के पेपर की अनिवार्यता को हटाने का सिर्फ वायदा किया गया। शोधार्थियों का कहना है कि ऐसा ही वायदा एक महीने पहले भी किया गया था, जो अभी तक पूरा नहीं किया है। हमें ऐसे वायदे पर विश्वास नहीं है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ ह्यूमेनिटीज के लिए नहीं, बल्कि वर्ष 2020-21 व 2021-22 बैच के सभी शोधार्थियों से वेब ऑफ साइंस में पेपरों की अनिवार्यता खत्म होनी चाहिए। शोधार्थियों ने वार्ता के लिए बुलाई गई कमेटी चीफ वार्डन अजय कुमार सिंह, कंट्रोलर ऑफ फाइनेंस अमित कुमार गर्ग, डीन अकेडमिक अफेयर्स रजनी शुक्ला, डीन छात्र कल्याण सुरेश वर्मा, डीन काॅलेज विजय शर्मा के सभी सदस्यों की नियुक्ति को ही अवैध बताया। शोधार्थियों का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगे पूरी नहीं हो की जाती, तब तक दिन-रात का अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।