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उम्र ढल गई, चलना-फिरना मुश्किल हुआ, पर मतदान के लिए दिखाया जज्बा

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गांव ककरोई में वोट डालने परिजनों के साथ जातीं 84 वर्षीय धनपति। संवाद - फोटो : Sonipat
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लोकतंत्र की ताकत नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे। उम्र बेशक ढल चुकी है, चलना फिरना भी मुश्किल हो गया है, उसके बावजूद बुजुर्ग व दिव्यांग जज्बे के साथ मतदान करने के लिए बूथ पर पहुंचे। इनका जोश युवा मतदाताओं से कम नहीं था। मतदान केंद्रों पर इनका जोश देखते ही बन रहा था। पंचायत चुनाव में बुजुर्ग, बीमार और दिव्यांग मतदाता हौसले के दम पर वोट देने पहुंचे।
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जज्बे की बात यह कि जो खुद चलने में असमर्थ हैं, बीमारी के कारण बैठ नहीं पा रहे हैं, वह लोकतंत्र के सिपाही बनकर वोट देने पहुंचे। मतदान केंद्रों पर कोई बुजुर्ग लाठी के सहारे तो कोई परिजनों के मदद से अपना वोट डालने पहुंचा। इसी तरह दिव्यांग भी किसी से कम नहीं दिखे। कई मतदान केंद्रों पर प्रशासन की ओर से व्हीलचेयर की व्यवस्था नहीं की गई थी। ऐसे में बुजुर्ग व दिव्यांग किसी परिजन की गोद में बैठक बूथ पर पहुंचे तो कोई अपनी व्हीलचेयर पर। उनका कहना था कि मताधिकार का प्रयोग हर नागरिक को करना चाहिए।
मुरथल में 99 साल के पूर्व सरपंच ने भी डाला वोट
गांव मुरथल के पूर्व सरपंच छोटूराम आंतिल अपने पौत्र नवीन व पौत्रवधू शीतल के साथ मतदान करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि वह वर्ष 1972 से 75 तक सरपंच रहे। अपने कार्यकाल में गांव में काफी विकास किया। वह हर बार वोट डालने के लिए मतदान केंद्र जाते हैं।

गांव बड़वासनी में परिजन की पीठ पर बैठकर मतदान केंद्र पर जाते 70 वर्षीय धर्मबीर। संवाद- फोटो : Sonipat

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