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Sonipat News: 16 साल का इंतजार खत्म, चेहरों पर लौटी मुस्कान

Mon, 10 Jun 2024 10:50 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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सूरज सिंह, गांव आंवली। संवाद
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सोनीपत। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार कुछ बीपीएल परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। वर्ष 2007 में बीपीएल परिवारों की आस बांधी गई थी कि उन्हें 100-100 वर्ग गज के प्लॉट देकर स्थायी आसरा दिया जाएगा। साल 2008 में ग्रामीणों के आवेदन करवाने के साथ तत्कालीन प्रदेश सरकार ने योजना की शुरुआत तो की, लेकिन कई पात्र इसके लाभ से वंचित रह गए। जिससे लाभार्थियों की प्लॉट मिलने का आस धीरे-धीरे टूटने लगी थी।
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अब पात्र लाभार्थियों का 16 साल का इंतजार खत्म हो गया है। हाथों में रजिस्ट्री मिलने के बाद लोगों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना (एमजीजीबीवाई) तहत चार जिलों के लाभार्थियों को 100-100 वर्ग गज के प्लॉटों की रजिस्ट्रियां दी गईं। इनमें सोनीपत, पानीपत, रोहतक व करनाल जिले के 2690 बीपीएल पात्र परिवार शामिल हैं। 1794 लाभार्थी सोनीपत जिले से हैं। इसके लिए मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सोमवार को राज्यस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुछ पात्र लाभार्थियों को अपने हाथों से प्लॉटों की रजिस्ट्रियां सौंपीं। प्लॉटों की रजिस्ट्रियां मिलने से लाभार्थियों के चेहरों पर अलग ही खुशी दिखाई दी।
लाभार्थियों ने यूं बयां की खुशी
तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2007 में बीपीएल पात्र लोगों को 100-100 वर्ग गज के प्लॉट देने की योजना तैयार की थी। उस दौरान पूर्व सरपंच ने गांव में प्लॉट काटने की बात का विरोध किया और स्टे ले लिया था। ग्रामीण वर्ष 2011-12 में कोर्ट से केस जीत चुके हैं। अब जाकर प्लॉटों की निशानदेही करवाई गई है।
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सूरज सिंह, आंवली
महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत 100 वर्ग गज प्लॉट के लिए वर्ष 2008 में आवेदन किया था। जब गांव में प्लॉट कटने लगे तो किसी ने जमीन पर कब्जा कर लिया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने कब्जे को छुड़वाया। अब गांव के 148 लोगों को प्लॉटों की रजिस्ट्री मिलने से खुशी का माहौल है।
जाक्षी, आंवली
आखिरकार 16 साल बाद लाभार्थियों की मेहनत रंग ले आई है। छोटे से मकान में चार बच्चों के साथ गुजारा कर रहे हैं। अब बड़ा प्लॉट तो मिल गया है, लेकिन सरकार उसमें एक कमरा व शौचालय बनवाकर देती तो ज्यादा खुशी होती। महंगाई के दौर में घर बनाना मुश्किल है।
संतोष, आंवली
साल 2008 में आवेदन करने के बाद अब मार्च 2024 में लाभार्थियों को प्लॉट आवंटन किए गए हैं। ग्रामीण काफी समय से प्लॉट की मांग कर रहे थे। अधिकारी कहते थे कि गांव में प्लॉट काटने की जगह नहीं है। मजदूरी करके चार बच्चों का लालन-पालन कर रहे हैं। महंगाई के दौर में जमीन खरीदना मुश्किल है।
सुमन, खेवड़ा
लाभार्थियों की 16 साल से बंधी प्लॉट मिलने की आस आज पूरी हुई है। रजिस्ट्री मिलने से मन में काफी खुशी है। अब खुद का घर बनाकर स्थायी आसरा मिल जाएगा। अब तक मेहनत मजदूरी करके 35 गज के मकान में गुजारा करना पड़ रहा था। चार बच्चों के साथ छोटे घर में रहना मुश्किल था।
सुदेश, खेवड़ा
गांव में 69 लाभार्थियों को प्लॉट की रजिस्ट्रियां मिलने से खुशी है। लंबे समय से प्लॉट मिलने का इंतजार कर रहे थे। प्लाॅट काट भी दिए गए थे, लेकिन उनका आवंटन नहीं किया गया। कई बार अधिकारियों को शिकायत देकर प्लॉट दिलवाने की मांग की गई, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही थी।
रोशन, छपरा
गांव में कई सरपंच आए और चले गए, सभी से प्लॉट आवंटन की मांग की गई, लेकिन लग रहा था कि प्लॉट मिलने का सपना सिर्फ सपना ही बनकर रह जाएगा। वर्ष 2008 में आवेदन करने के बाद कई कार्यालयों के चक्कर लगाए, कहीं से कोई उम्मीद नहीं बंधी थी। प्लॉट की रजिस्ट्री मिलने से काफी खुशी है।
गीता, उदेशीपुर
महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत 16 साल पहले 100 वर्ग गज के प्लॉट के लिए आवेदन किया था। इसके बाद प्लॉट के लिए सरपंच से लेकर सोनीपत मुख्यालय तक अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया गया। प्लॉट मिलने की उम्मीद खत्म हो चुकी थी। आज रजिस्ट्री मिलने से पूरे परिवार में खुशी है।
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गीता देवी, उदेशीपुर

सूरज सिंह, गांव आंवली। संवाद

सूरज सिंह, गांव आंवली। संवाद

सूरज सिंह, गांव आंवली। संवाद

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