इजरायल समेत कई देशों संग एक्सीलेंस सेंटर बना रही सरकार, विदेशों में छाएंगी मुर्रा नस्ल की भैंस
अंकित चौहान
सोनीपत। हरियाणा की मुर्रा नस्ल की भैंस विदेशों तक छाएंगी, क्योंकि यहां से कई देशों ने मुर्रा नस्ल की भैंस की खूबियों को देखते हुए उसे अपने देश में लेकर जाने के लिए सरकार से करार किया है। हरियाणा सरकार भी इजरायल समेत कई अन्य देशों के साथ मिलकर एक्सीलेंस सेंटर बना रही है, जिनमें मुर्रा नस्ल की भैंसों के सहारे दूध का उत्पादन बढ़ाया जा सके। एग्री लीडरशिप समिट में वियतनाम, न्यूजीलेंड, नामीबिया, जिम्बाब्वे, ब्राजील समेत कई अन्य देशों के प्रतिनिधि पहुंचे और मुर्रा नस्ल की भैंसों को लेकर उनके साथ कृषि मंत्री ओपी धनखड़ की चर्चा हुई। इसके अलावा हरियाणा में जिस तरह से खेती को उद्योग के साथ जोड़ा जा रहा है, उसको लेकर भी विदेशी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत हुई। एग्री लीडरशिप समिट में वियतनाम के एंबेसडर फेम से चांग ने बताया कि वह हरियाणा में खेती और मुर्रा नस्ल की भैंस को देख रहे है। क्योंकि उनके यहां डेयरी उद्योग बहुत ज्यादा है और वहां भी दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। हरियाणा की मुर्रा नस्ल की भैंस दूध देने में सबसे बेहतर मानी जाती है, इस कारण ही यहां से भैंस लेकर जाने के लिए सरकार के साथ करार हुआ है। कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने बताया कि इजरायल समेत कई देशों के साथ मिलकर सरकार एक्सीलेंस सेंटर बना रही है, जिससे मुर्रा नस्ल की भैंसों को बढ़ावा मिल सके और दूध उत्पादन भी बढ़ सके। मंत्री ने बताया कि पहले हरियाणा में दुग्ध उत्पादन 835 ग्राम प्रति व्यक्ति था जो इस समय बढ़कर 1005 ग्राम हो गया है। इस समय प्रति पशु यहां 6.8 लीटर दूध होता है, जिसे बढ़ाकर 10 लीटर तक करना है और इसके लिए हर तकनीक पर काम किया जा रहा है।