सिरसा । भारत बंद के कारण रोडवेज की बसें बंद होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रोडवेज की 228 में से मात्र 32 बसें ही चलीं। यह बसें भी विभाग ने अलग-अलग गलियों में छुपाकर चलवाई। क्योंकि रोडवेज यूनियन के कर्मचारी डिपो के बाहर धरने पर डटे हुए थे। इस दौरान परेशान यात्रियों के लिए ऑटो चालक, ई-रिक्शा व निजी बसें सहारा बनीं। फतेहाबाद व चौपटा रानियां व अन्य नजदीकी ग्रामीण एरिया में ऑटो चालकों ने सेवाएं दीं। जानकारी के अनुसार सुबह के समय चौपटा रूट के लिए कुछ चालकों ने बसों को चलाया जो विरोध में शामिल नहीं हुए। जिसका यूनियन ने कड़ा विरोध भी किया।
मामला 1
पंजाब के सीतोगुना निवासी महिला सीलो ने बताया कि वह अपनी बहु का सादुलपुर इलाज करवाने के लिए गई थी। एक सप्ताह बाद जब लौटी हुई तो हड़ताल के चलते परेशानी का सामना करना पड़ा। अब दो गुणा खर्च कर घर को जाना पड़ेगा। हड़ताल ने आमजन को परेशान कर दिया है।
मामला 2
पंजाब के सरदूलगढ़ निवासी मीनो देवी, काका सिंह व मनोज कुमार ने बताया कि सभी किसी काम के सिलसिले में राजस्थान के शहर हनुमानगढ़ गए हुए थे। लेकिन सिरसा आने के बाद जानकारी मिली कि यहां बसें बंद हैं। जिसकी वजह से अब सरदुलगढ़ भी नहीं जा पा रहे हैं। घर में बच्चे अकेले इंतजार कर रहे हैं और हमें उनकी चिंता सता रही है।