सिरसा। जिले में नशा एक गंभीर समस्या है। इससे न जाने कितने अपने अपनों को खो चुके हैं। ऐसे ही मानव अधिकारी परिषद हरियाणा ट्रस्ट के संस्थापक तरूण भाटी ने नशे की लत की कारण दोस्त को मरते हुए देखा। इसके बाद उन्होंने युवाओं को नशे के दलदल से बाहर निकालने का बीड़ा उठाया। तरूण भाटी अब तक 15 युवाओं का नशा छुड़वा चुके हैं। इसके अलावा 25 हजार युवाओं को नशा न करने की शपथ दिलवा चुके हैं।
तरूण भाटी ने दो वर्ष पहले बेटा बचाओ अभियान शुरू किया। जिले के विश्वविद्यालय, कॉलेज, स्कूल व गांवों में पुलिस व प्रशासन के साथ मिलकर कार्यक्रम आयोजित करवाए। इसमें युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया और उन्हें नशा न करने की शपथ भी दिलवाई। तरुण भाटी अब तक जिले में 25 हजार युवाओं को नशा न करने को लेकर शपथ भी दिलवा चुके हैं। तरुण भाटी ने बताया कि शहर के ही हिसार रोड स्थित एक कॉलोनी में उसका बचपन का दोस्त रहता था। वह चिट्टा की लत में पड़ गया। जब उन्हें जानकारी मिली तो उन्होंने कई स्थानों से उसका इलाज भी करवाया। स्थिति काफी खराब होने के कारण उसके दोस्त ने उसकी आंखों के सामने ही दम तोड़ दिया। इससे उन्हें काफी सदमा भी पहुंचा। भाटी ने बताया कि जब उन्होंने यही स्थिति अपने परिवार के साथ होने की आशंका जताई तो उन्होंने बेटा बचाओ अभियान शुरू कर दिया। इसके तहत बच्चों व उनके अभिभावकों को नशे दुष्प्रभावों, बच्चों पर नजर रखने के भी जागरूक किया जाता है। उन्होंने प्रशासन के समक्ष मेडिकल पर मिलने वाली सिरिंज को बैन करने की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि बिना पर्ची के किसी भी मेडिकल पर सिरिंज न मिलने पर नशे पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। संवाद
ट्रस्ट से जुड़े है 25 लोग, करवाए जाते सामाजिक कार्य
मानव अधिकारी परिषद हरियाणा ट्रस्ट की ओर से पौधरोपण, रक्तदान करने, विधवाओं को राशन बांटने, गरीब बच्चों को पढ़ाई का खर्च उठाने जैसे सामाजिक कार्य करवाए जाते हैं। ट्रस्ट में करीब 25 सदस्य जुड़े हुए हैं। ट्रस्ट की ओर से हर तीन माह बाद रक्तदान शिविर, पांच हजार से अधिक पौधरोपण, 195 महिलाओं को राशन देने का कार्य किया जाता है।
नशा पीड़ित के ठीक होने पर दिया जाता है दो किलो देसी घी
तरुण भाटी ने बताया कि वह एनजीओ के माध्यम से जिले के 15 युवाओं को नशे के दलदल से बाहर निकाल चुके हैं। इनमें से कई युवक चिट्टे का इंजेक्शन लगाने, शराब व मेडिकल नशे के आदी थे। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले ही उनके पास एक 20 वर्षीय युवक का मामला आया था। इसमें उसने बताया था कि वह अपने दोस्त के साथ मिलकर इंजेक्शन लगाता था। इसके कारण युवक के दोस्त की मौत हो गई थी। इसके बाद युवक ने नशा की लत लगने की जानकारी परिवार को दी। युवक की बहन ने टीम से संपर्क किया। इसके बाद उसे 20 20 वर्षीय का इलाज व कांउसिलिंग करवाई गई। अब वह युवक ठीक हो चुका है। उन्होंने बताया कि जब नशा पीड़ित स्वस्थ हो जाते हैं, तो टीम की तरफ से उन्हें दो किलो देसी घी देकर सम्मानित किया जाता है।