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Sirsa News: बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसे रहे 256 वर्ष पुराने गांव रत्ताखेड़ा के ग्रामीण

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राजू
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ओढां। डबवाली विधानसभा हलका का 256 वर्ष पुराना गांव रत्ताखेड़ा में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। गांव में डाकघर, बैंक, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल का अपग्रेड न होना व जलघर में वाटर टैंक की कमी से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। 11वीं व 12वीं की शिक्षा ग्रहण करने के लिए विद्यार्थियों को मजबूरन गांव नुहियांवाली व रिसालियाखेड़ा के स्कूलों में जाना पड़ता है।
जिला सिरसा से 40 किलोमीटर एवं उप-तहसील गोरीवाला से नौ किलोमीटर दूर डबवाली विधानसभा हलका में पड़ने वाले इस गांव की आबादी करीब 2200 है। इस गांव का रकबा करीब साढ़े चार हजार बीघा है।
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बुजुर्गों के अनुसार गांव का इतिहास करीब 256 वर्ष पुराना है। उन्होंने बताया कि गांव में जाट बिरादरी के रत्तूराम एवं सुथार बिरादरी के किशनाराम सबसे पहले आए थे। इसके बाद उन्होंने अपनी-अपनी बिरादरियों के लोगों को धीरे-धीरे यहां एकत्र किया। इसके बाद ये गांव अस्तित्व में आया। बुजुर्गों के अनुसार रत्तूराम के नाम से ही गांव रत्ताखेड़ा आबाद हुआ। अस्तित्व में आने के बाद गांव को सात पत्तियों में विभाजित किया गया, जिसे पतराम पत्ती, मोती पत्ती, शिवजी पत्ती, रामदान पत्ती, मंगला पत्ती, बख्तावर पत्ती एवं भीखा पत्ती का नाम दिया गया। उन्होंने बताया कि गांव में पानी की किल्लत होनेे के कारण ग्रामीण साथ लगते गांव नुहियांवाली व रामगढ़ से ऊंटों पर पानी लाते थे।







मामराज सुथार बने पहले सरपंच व मंगलराम पंच

गांव बसने के साथ ही मंगला राम सुथार को नंबरदार चुना गया। इसके बाद उनका बेटा मामराज व लालचंद नंबरदार बने। मौजूदा समय में गांव की नंबरदारी विनोद कुमार के पास है। पंचायती राज लागू होने के बाद गांव रत्ताखेड़ा व राजपुरा दोनों गांवों का मामराज सुथार को सर्वसम्मति से साझा सरपंच व गंगाजल बलिहारा, जालू राम मेघवाल, राजपुरा के रावत सिंह तथा वीर सिंह राजपूत को पंच चुना गया। इसके बाद सरपंची घड़सी राम डूडी, मोती राम सुथार, लालचंद नंबरदार, दुलीचंद बलिहारा, काशीराम डूडी, शकुंतला सुथार, बृजलाल भाखर, कैलाश देवी भाखर, भादर राम सुथार, मनभरी देवी, इन्दिरा बलिहारा व संतो देवी सुथार, अनिल कालवा से होकर मौजूदा समय में लीलाधर कुलरिया के हाथों में पहुंची है।





शिक्षा का स्तर



गांव में सबसे पहले तीसरी कक्षा तक की शिक्षा शुरू हुई। इसके बाद 27 जून 1985 में शिक्षा मंत्री जगदीश नेहरा ने राजपुरा रत्ताखेड़ा दोनों गांवों की मांग पर इसे मिडिल का दर्जा प्रदान किया। 1991 में स्कूल को हाई स्कूल का दर्जा मिला। मौजूदा समय में उपरोक्त दोनों गांवों के विद्यार्थी गांव में हाई स्कूल तक की ही शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।





राजा रसालू सिंह ने बनवाया था किला

बताया जा रहा है कि किसी समय में राजा रसालू सिंह ने गांव से दूर करीब 10 एकड़ जगह में आते-जाते समय रुकने के लिए किला बनवाया था। बताया ये भी जा रहा है कि उन्होंने रिसालियाखेड़ा, रामपुरा बिश्नोईयां, रामगढ़, राजपुरा व रत्ताखेड़ा को विशेष तौर पर नोमिनेट किया था। मौजूदा समय में उक्त जगह लोगों ने धीरे-धीरे कब्जा ली, लेकिन कुछ जगह आज भी खाली पड़ी इतिहास की याद ताजा करवाती है।



सम्मान के साथ लिया जाता है सदासुख सुथार का नाम



किसी अपने समय मेें राजस्व विभाग में बीकानेर में एक बड़े अधिकारी के पद पर रहे सदासुख सुथार का नाम आज भी क्षेत्र के अलावा राजस्थान क्षेत्र में सम्मान के साथ लिया जाता है, क्योंकि वे अपने समय में गांव में ही नहीं अपितु क्षेत्र में भी एक बड़े अधिकारी के पद पर थे। मौजूदा समय में उनके पड़पौत्र लीलाधर गांव के सरपंच हैं।



ये हैं सुविधाएं



गांव में बस सेवा, सहकारी समिति, पक्की गलियां, वाईफाई, लाईब्रेरी, खरीद केन्द्र, जलघर, ग्राम सचिवालय, तीन स्कूल, आंगनबाड़ी, धर्मशालाएं, रत्ताखेड़ा खरीफ चैनल, बिजली सुविधा व पशुधन केंद्र सहित अन्य सुविधाएं हैं।
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लोगों ने मुझे जिन उम्मीदों के साथ सरपंच चुना है, मैं उन पर खरा उतरने की पूरी कोशिश कर रहा हूं। गांव में विकास कार्य प्रगति पर है। गांव में जो समस्याएं उनका प्रस्ताव पारित कर भेजा जाएगा ताकि उनका शीघ्र ही समाधान हो सके। लीलाधर कुलरिया, सरपंच रत्ताखेड़ा
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