संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। परिवहन विभाग के निर्देश के बाद अब रोहतक में 10 वर्ष की अवधि पूरी कर चुकी 18 बसों को सिरसा डिपो को सौंपा गया है। इन बसों की स्थिति पहले से ही काफी खराब है। सिरसा डिपो में पहुंची किसी बस के टायर फटे हैं तो किसी के शीशे टूटे व सीटें ही फटी हुई हैं। ज्यादातर बसों की स्थिति काफी कंडम हो चुकी है। ऐसे में इनको परिवहन लायक बनाने के लिए सिरसा डिपो को पहले अच्छा खासा खर्चा करना पड़ेगा।
एनसीआर क्षेत्र में रोहतक डिपो में 10 वर्ष की अवधि पूरी कर चुकी बसों की एंट्री बैन किए जाने के बाद मुख्यालय की ओर से वहां की सभी बसों को अलग-अलग डिपो में भेजा जा रहा है। जिनमें से रविवार को 18 बसें सिरसा डिपो में पहुंची है। यात्रियों की सुविधा के लिए मुख्यालय की ओर से झज्जर और रोहतक डिपो से कुल 38 बसें सिरसा में भेजी जानी है। लेकिन बसों की स्थिति काफी खराब होने के कारण यात्रियों को इसका लाभ फिलहाल मिलना बेहद ही मुश्किल है। डिपो में पहुंची बसों की सीटें पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं। वहीं बाहर की स्थिति भी काफी खस्ताहाल है जबकि कई बसों के तो टायर तक फटे हुए हैं। बता दें कि इससे पहले भी सिरसा डिपो में रोहतक से पांच बसें आ चुकी हैं। जिनको चलने लायक बनाने के लिए करीब दो से तीन लाख रुपये का खर्च आया था।
कोई बस धक्का स्टार्ट तो कोई बीच रास्ते में ही बंद हो गई थी
रोहतक डिपो के चालक और मैकेनिक बसों को सिरसा डिपो में छोड़ गए हैं। ऐसे में कई बसें तो बीच रास्ते में ही खराब गई थी। जिसके कारण चालकों को भी इन बसों को डिपो तक पहुंचाने में परेशानी का सामना करना पड़ा था। ऐसे में अगर बसों में यात्रियों को सवार किया जाता है तो उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं कई बसों की बैटरी खत्म होने के कारण चालकों को धक्का लगाकर भी शुरू करना पड़ा था।
1 अक्तूबर में दिल्ली के लिए बंद होगी सर्विस, नहीं पहुंची कोई भी यूरो 6 मानक बस
दिल्ली सरकार ने प्रदेश में प्रदूषण को कम करने के लिए यूरो 6 मानक बसों को ही आने की अनुमति दी है। सिरसा डिपो के पास कोई भी यूरो 6 मानक बस नहीं है। जिसके कारण दिल्ली रूट पर चलने वाली बसों के पहिये थम जाएंगे। बता दे कि रोडवेज के पास यूरो 4 मानक की बसें है। जोकि किलोमीटर स्कीम के तहत चलाई जा रही है। ऐसे में एक अक्तूबर से इन सभी बसों की एंट्री दिल्ली में बैन हो जाएगी। जबकि सिरसा से दिल्ली के लिए करीब 34 फेरे है। जबकि इनमें से कुछ बसों के रूट पहले ही कम हो गए हैं।
वर्जन
रोहतक डिपो से पहुंची बसों की स्थिति जांची जाएगी। अगर बसों की स्थिति अधिक खराब है तो उस पर विचार किया जाएगा। बसों को तैयार करने के बाद ही यात्रियों को इसमें सवार कर सुविधा दी जाएगी। मुख्यालय की ओर से रोहतक में 10 वर्ष तक चली हुई बसों को सिरसा में भेजा गया है। नई बसें भी जल्द ही सिरसा में पहुंचने की उम्मीद है। जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकेंगी।
-केआर कौशल, रोडवेज महाप्रबंधक, डिपो सिरसा।
बस में दिखाई देती खराब सीटें। संवाद- फोटो : Sirsa