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उम्मीद की मशाल : हादसे में गंवाए दोनों पैर तो अस्पताल में देखी व्यवस्था, शुरू कर दिया आश्रम

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सिरसा। यदि जीवन में कोई हादसा हो जाए तो कई बार व्यक्ति इतना निराश हो जाता है कि जिंदगी भी खत्म करने तक की सोचने लगता है। यदि एक व्यक्ति ऐसा भी जिसने हादसा होने के बाद नई सिरे से न केवल अपनी जिंदगी शुरू कि बल्कि दूसरों की जिंदगी बचाने का भी काम शुरू कर दिया। अब तक सड़कों पर घूम रहे 600 से ज्यादा बेसहाराओं को आसरा दे चुका है। इतना ही नहीं लावारिस और मानसिक रूप से विक्षिप्त महिलाओं युवतियों को भी छत दी। बिछड़े लोगों को परिवार से मिलाया। अब जल्द ही बच्चों के लिए नि:शुल्क स्कूल शुरू करने की योजना है। इतना ही नहीं पर्यावरण को सुधारने के लिए पौध नर्सरी भी शुरू कर दी गई है।
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ये सारी योजना सिरे चढ़ा रहे हैं सिरसा निवासी गुरविंद्र सिंह की। गुरविंद्र सिंह इस समय भाई कन्हैया आश्रम का संचालन कर रहे हैं। शहर के नागरिक अस्पताल रोड पर आश्रम स्थापित कर सेवा शुरू करने वाले गुरविंद्र सिंह ने ट्रस्ट के माध्यम से अब नेशनल हाईवे पर बड़ा आश्रम विकसित किया है। यहां अब तक 600 से ज्यादा बेसहाराओं को आसरा दिया गया है। इसके अलावा 370 व्यक्तियों और महिलाओं को परिवार से भी मिलवाया जा चुका है।
सड़क हादसा बना सेवा की शुरुआत का टर्निंग प्वाइंट
गुरविंद्र सिंह बताते हैं कि वह 7 जून 1997 को स्कूटर पर ऐलनाबाद से सिरसा आ रहे थे। रास्ते में सड़क हादसा हो गया। इलाज के लिए उन्हें लुधियाना के डीएमसी में दाखिल करवाया गया। रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के कारण कमर से नीचे का हिस्सा बेकार हो गया। डॉक्टरों ने बताया कि आगे की जिंदगी व्हील चेयर पर गुजारनी होगी। इस दौरान उन्होंने बेड पर पड़े-पड़े सोचा कि अब जिंदगी का आगे क्या होगा। लेकिन समाजसेवा का टर्निंग प्वाइंट भी यही से शुरू हुआ। गुरविंद्र सिंह बताते हैं, उन्होंने देखा कि अस्पताल में एक समाजसेवी संस्था मरीजों को सुबह शाम नि:शुल्क दूूध सेवा शुरू करवाती है। इतना ही नहीं मरीजों को दातुन ब्रेड आदि भी देती है। यही से प्रेरणा लेकर उन्होंने भी लौटकर सिरसा नागरिक अस्पताल में कुछ दोस्तों के साथ मिलकर नि:शुल्क दूध सेवा शुरू कर दी। 1 जनवरी 2005 से नागरिक अस्पताल में शुरू की गई दूध सेवा में ऋषिपाल जिंदल, रंजीव गर्ग, सुधीर मरोदिया, गुरमीत सिंह व प्रियवर्धन ने भी साथ दिया।
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ऐसे की आश्रम की शुरुआत
नवंबर 2010 में एक औरत विक्षिप्त हालत में सड़क पर घूम रही थी। इसे सड़क से किसी सुरक्षित जगह पर भेजने की कोशिश की तो किसी ने बताया गया कि इसे पिंगलबाड़ा में आश्रम है, वहां पर छोड़ आएं। इंटरनेट पर सर्च किया तो पता चला कि अमृतसर में पिंगलबाड़ा आश्रम है। लेकिन पुलिस कार्रवाई, एक आश्रम से दूसरे आश्रम में संपर्क की प्रक्रिया लंबी होती चली गई। इसमें बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसे में उस महिला की सड़क पर ही मौत हो गई। इसके बाद बहुतकनीकी कॉलेज के पास 200 गज का प्लॉट लिया और आश्रम स्थापित किया। ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा ना आए। इस आश्रम में अभी तक 600 से ज्यादा बेसहारा मंदबुद्धि, दिव्यांगों को सहारा दिया गया है। इस समय आश्रम में 335 बेसहारा रह रहे हैं। जबकि 370 का सफलतापूर्वक इलाज के बाद उन्हें अपने परिवारों से भी मिलवा दिया गया है। आश्रम में इस समय 44 बच्चे भी हैं। जिनका इलाज संभाल और शिक्षा का प्रबंध किया जा रहा है। इसके अलावा 22 बेसहारा बुजुर्ग भी हैं।
ये सेवाएं भी शुरू करवाई
नि:शुल्क एंबुलेंस सेवा : भाई कन्हैया मानव सेवा ट्रस्ट की ओर से वर्ष 2015 में एंबुलेंस सेवा की शुरूआत की गई।अभी तक 3600 से ज्यादा सड़क हादसों में नि:शुल्क सेवा दी गई है। 2300 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के लिए अस्पताल तक सुरक्षित तरीके से भेजा गया।
अब स्कूल शुरू करने की तैयारी
गुरविंद्र सिंह बताते हैं कि ट्रस्ट की ओर से अब भाई कन्हैया पब्लिक स्कूल स्थापित किया जाएगा। इसके लिए नेशनल हाईवे पर स्कूल के लिए भूमि खरीद ली गई है। इस स्कूल में नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध करवाई जाएगी। इसमें भाई कन्हैया आश्रम के और अन्य अनाथालयों के बच्चों को फ्री शिक्षा मिलेगी। जिन बच्चों के माता-पिता नहीं है और रिश्तेदारों के पास रह रहे हैं उन्हें भी दाखिला मिलेगा।
पर्यावरण के प्रति निभाया फर्ज, पौध नर्सरी शुरू
भाई कन्हैया आश्रम की ओर से अब पर्यावरण के प्रति अपनी सेवा शुरू करने के लिए भी कदम उठाया गया है। पौध नर्सरी शुरू कर दी गई है। इसमें तैयार पौधे विभिन्न जगहों पर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं ताकि हरियाली को बढ़ावा दिया जा सके।
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