ओढां। गांव पन्नीवाला मोटा में ग्रामीणों ने जलघर में सफाई व्यवस्था न होने को लेकर जन स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ रोष व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि जलघर की मरम्मत और सफाई में कुछ वर्ष पूर्व ही सवा करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च हुई थी, लेकिन फिर वही स्थिति उत्पन्न हो गई है।
ग्रामीण विजय कस्वां, राय सिंह, अजयपाल, अनिल कुमार, साहब राम, संदीप बादल, सुरेश कुमार, छोटू राम, लालचंद व आत्माराम आदि ने बताया कि गांव के मुख्य जलघर में चार बड़े वाटर टैंक हैं। इनमें से एक टैंक लीकेज होने के चलते उसमें पानी स्टोर नहीं हो पाता। यह पिछले लंबे समय से खाली पड़ा है।
उन्होंने बताया कि जो 3 टैंक हैं, वह समय खाली हैं। इनमें गाद व काई जमी हुई है। लंबे समय से सफाई न होने के चलते लोग यही दूषित पानी पीने को विवश हो रहे हैं। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती पंचायत के कार्यकाल में जलघर पर करीब एक करोड़ 35 लाख रुपये की राशि खर्च हुई थी। इसके बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी थी कि उनकी पेयजल संबंधी समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन पुन: वही स्थिति उत्पन्न हो गई है। जल घर में न तो टैंकों की सफाई है और न ही परिसर की सफाई।
इस विषय में ग्रामीणों ने चंडीगढ़ में टोल फ्री नंबर पर भी शिकायत दी थी। ग्रामीणों का कहना है कि उनका गांव आबादी के हिसाब से बड़ा है। गांव में 2 जलघर हैंं, लेकिन फिर भी गांव के कुछ हिस्सों में करीब 20 दिनों से पेयजल आपूर्ति ही नहीं हो रही। इसका कारण पाइप का कहीं से रुकना है। ऐसे में भीषण गर्मी में उक्त लोग पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि जन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उनकी समस्या को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। मुख्यालय में शिकायत दर्ज करवाने के बावजूद भी एसडीओ व जेई बातों से ही अपने कर्तव्य की इतिश्री कर रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि इस समय नहरी बंदी के चलते टैंकों में पानी नहीं है। ऐसे में इनकी सफाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी समस्या का शीघ्र ही समाधान नहीं किया गया तो वे धरना देने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों की ओर से सफाई व्यवस्था को लेकर फोन आया था। दो दिन बाद नहरों में पानी आ जाएगा। ऐसे में अचानक सफाई करवाना संभव नहीं है। वैसे भी टैंकों में करीब दो फुट तक पानी फिलहाल है। सफाई कार्य पंचायत मनरेगा के तहत करवाती है। इस विषय में ग्राम सरपंच से बात करेंगे। रही बात दूषित पानी की तो गांव में पानी तो जलघर से फिल्टर होकर ही जाता है। - रामरखा, एसडीओ (जन स्वास्थ्य विभाग)