संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। रानियां को उपमंडल बनाने की मांग पिछले लंबे समय से चली आ रही है। यहां के बाशिंदे पिछले लंबे समय संघर्षरत हैं। इस मांग को लेकर जिले के अधिवक्ता जहां हड़ताल कर चुके हैं, वहीं व्यापारी भी बाजार बंद कर रोष जता चुके हैं। इस बार के चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बना है। बड़े राजनेताओं ने रानियां को उपमंडल बनाने का आश्वासन दिया है।
रानियां को हलका बनाने की मांग आज की नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रही है। वर्ष 2009 में कांग्रेस सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा रानियां में एक रैली करने आए थे। क्षेत्र के लोगों ने उनके समक्ष यह मांग रखी थी, तब उन्होंने इसे शीघ्र पूरा करने का आश्वासन दिया था। पांच साल कांग्रेस सरकार के बीत गए, लेकिन यह मांग पूरी नहीं हुई। वर्ष 2014 में भाजपा सरकार सत्ता में आई। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष इस मांग को रखा। इसके बाद भी यह मांग पूरी नहीं हो सकी। यहां के बाशिंदों का कहना है कि हर बार नया नेता आता है और रानियां को उपमंडल बनाने की बात कहकर वोट बटोर जाता है, लेकिन बाद में इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
-21 दिन चला आंदोलन, बाजार भी हुआ था बंद
जुलाई में रानियां बार एसोसिएशन ने रानियां को उपमंडल बनाने की मांग को लेकर धरना दिया था। इनका साथ शहर के व्यापारियों ने भी दिया। 31 जुलाई को बाजार बंद रखा था। भाजपा के जिला प्रधान शीशपाल कंबोज ने धरनारत्त वकीलों को पहले सीएम नायब सिंह सैनी से मिलवाया था। सीएम ने उनको आश्वासन दिया था कि रानियां को उपमंडल का दर्जा दिया जाएगा, जल्द ही रानियां में उनकी रैली होगी और इसमें घोषणा कर दी जाएगी, लेकिन इसी बीच आचार संहिता लग गई और यह मुद्दा एक बार फिर मुद्दा बनकर ही रह गया है।
यहां ग्रामीण न्यायालय को अपग्रेड कर दिया गया है, लेकिन जब तक उपमंडल का दर्जा नहीं मिल जाता तब तक न्यायालय की कार्रवाई शुरू नहीं हो सकती। बिजली मंत्री ने लगभग 3 साल पहले बार एसोसिएशन की अनिश्चितकालीन हड़ताल व धरना प्रदर्शन में पहुंचकर आश्वासन दिया था कि रानियां को उपमंडल का दर्जा दिलाया जाएगा। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। - रिंकल बांगा, प्रधान बार एसोसिएशन, सिरसा
जब से रानियां हलका बना है, तब से ही उपमंडल बनाने की मांग उठ रही है। पहले यह मांग छोटे लेवल की थी, अब आवाज मुखर हो गई है। बीच में आचार संहिता लग गई, अन्यथा इस बार रानियां को उपमंडल बनवाकर ही हम दम लेते। - भूपेंद्र विर्क, उपप्रधान बार एसोसिएशन रानियां
रानियां को उपमंडल बनाने के दावे हमेशा होते रहते हैं, लेकिन आज तक किसी भी नेता ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। चुनावी मुद्दा बनता है, लेकिन चुनाव के बाद दबा दिया जाता है। रानियां को उपमंडल बनाने की फाइल पिछले आठ सालों से अटकी हुई है। - मुकेश बंसल, सह सचिव बार एसोसिएशन रानियां
रानियां हलका बन चुका है, लेकिन यहां पर सुविधाएं अभी भी तहसील स्तर की हैं। कई कामों के लिए लोगों को 22 किलोमीटर दूर ऐलनाबाद जाना पड़ता है। कई केसों के लिए भी लोगों को उपमंडल स्तर पर चक्कर काटने पड़ते हैं। - रणजीत सिंह विर्क, सचिव, बार एसोसिएशन, रानियां।