संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहरी क्षेत्र का विकास सिर्फ एक जेई को भरोसे है। नगर परिषद में जेई के छह पद हैं, जिनमें से पांच काफी समय से खाली पड़े हैं। अधिकारी खाली पद भरने को लेकर उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र लिखा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
हालांकि एसडीओ के दोनों पद भरे हुए हैं, लेकिन एक एसडीओ साहब तीन साल की स्टडी लीव पर गए हुए हैं। ऐसे में जब तक वह नहीं आते है , तब तक नगर परिषद प्रशासन को एक ही एसडीओ से काम चलना होगा। वहीं अधिकारियों के पद पद रिक्त होने से विकास कार्यों की गुणवत्ता व काम पर असर पड़ रहा है। जबकि नगर परिषद के अधिकारी कई बार मुख्यालय को जेई के पद भरने को लेकर लिख चुके हैं।
हिसार से आए और हिसार चले गए
नगर परिषद में आठ माह पहले हिसार से दो जेई के तबादले हुए सिरसा हुए थे। एक माह काम करने के बाद जेई कुलदीप का वापस तबादला हो गया। उसके बाद जेई राकेश कुमार आए। कुछ समय बाद उनका भी तबादला हिसार हो गया। तभी से एक जेई से ही शहर विभाग के प्रोजेक्ट बनाने का जिम्मा है। इतना ही नहीं, सीएम विंडो, आरटीआई आदि का जवाब भी जेई को ही देना है।
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जेई की कमी से यह हो रहा नुकसान
1- सभी विकास कार्याें का निरीक्षण जेई नहीं कर पाता है।
2 - जेई के पास काम की अधिकता रहती है। ऐसे में कई महत्वपूर्ण कार्य करने में देरी होती है।
3 सफाई व्यवस्था को लेकर अलग जेई की जरूरत होती है। जो उनके प्रोजेक्टों व टेंडर आदि को देख सकते। जेई की कमी होने से व्यवस्था बिगड़ रही है।
4 सरकार क प्रोजेक्टों को सिरे चढ़ाने में देरी हो रही है।
कोटस
सरकार को जेई के पद भरने को लेकर कई बार लिखा जा चुका है। जेई के पद भरते हैं तो काम करने में आसानी होती है। विकास कार्य के प्रोजेक्ट तेजी से बनाए जा सकते हैं और मौके की मॉनिटरिंग भी समय पर होती है। - प्रवीण कुमार, एक्सईएन, नगर परिषद