हितेश चतुर्वेदी
सिरसा। आज लोगों की मेहनत की कमाई बाजारवाद की भेंट चढ़ती जा रही है। उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापनों, घटिया वस्तुएं एवं सेवाएं सहित अन्य बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उपभोक्ता में उत्पादकता और गुणवत्ता संबंधित जागरूकता को बढ़ाने व उपभोक्ता कानूनों के बारे में लोगों को जानकारी देने के उद्देश्य से हर वर्ष 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है।
सिरसा जिला उपभोक्ता न्यायालय में उपभोक्ताओं से जुड़े 1318 विचाराधीन हैं। वर्ष 2023 में 14 मार्च तक 138 उपभोक्ताओं ने अपनी शिकायत उपभोक्ता न्यायालय में दर्ज करवाई। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष पदम सिंह ठाकुर ने जनवरी 2023 से लेकर 14 मार्च 2023 तक 140 शिकायतों का निपटारा किया है। अध्यक्ष पदम सिंह ठाकुर ने बताया कि उपभोक्ता न्यायालय में पीड़ित स्वयं ही अपनी शिकायत लिखित में कर सकता है। उसे वकील करने की कोई जरूरत नहीं होती। उपभोक्ता न्यायालय में सुनवाई तेजी से होती है। उन्होंने कहा कि विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस आग्रह करने का अवसर देता है कि सभी उपभोक्ताओं के अधिकारों को मान्यता दी जाए और उनकी रक्षा की जाए। मौजूदा समय में उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति सचेत व जागरूक नहीं होगा तो वह धोखाधड़ी का आसानी से शिकार बन सकता है। बीमा कंपनियां हों या दूसरी कंपनियां। इनसे कोई भी पॉलिसी या प्रोडक्ट लेने से पहले नियम व शर्तों को जरूर पढ़ना चाहिए। अक्सर होता ऐसा है कि उपभोक्ता नियम व शर्तों के बारे में ध्यान नहीं देते और बाद में नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आज ऑनलाइन खरीद के नाम पर काफी ठगी हो रही है। धोखाधड़ी में माहिर लोग लोगों को ठगने के लिए भ्रामक विज्ञापन जारी करते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को पूरी पड़ताल के बाद ही किसी कंपनी पर भरोसा करना चाहिए। उपभोक्ता फोरम में कोई भी उपभोक्ता 2 साल तक केस दर्ज करवा सकता है। संवाद
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम छह बुनियादी अधिकारों की गारंटी
एक नागरिक के पास उपभोक्ता होने के नाते कुछ अधिकार भी है, परंतु बहुत से लोग अपने अधिकारों के प्रति उदासीन हैं।उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए ही उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 कानून को लाया गया। इसके तहत उपभोक्ता को सुरक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, चुनने का अधिकार, सुनने का अधिकार, निवारण का अधिकार और शिक्षा के अधिकार के रूप में छह बुनियादी अधिकारों की गारंटी दी है। इसके तहत उपभोक्ता के साथ शोषण एवं धोखा होने पर वह उपभोक्ता न्यायालय का द्वार खटखटाकर न्याय पा सकता है।
एक से पांच लाख रुपये के मामले में उपभोक्ता को फीस जमा करने की जरूरत नहीं है। 10 से 20 लाख तक भी फीस मात्र 200 रुपये और उससे ऊपर 400 रुपये तक फीस जमा करनी है। पहले उपभोक्ता फोरम को जुर्माने की 20 लाख तक की पावर थी। अब एक करोड़ का जुर्माना करने की पावर हो गई। एक से 10 करोड़ स्टेट कमीशन और 10 करोड़ से अधिक की नेशनल कमीशन को पावर दी गई है। उससे अधिक के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस दायर करना होता है। एक करोड़ तक के मामले जैसे प्लाट व अन्य के लिए जिले में केस दायर किया जा सकता है। फैसले के खिलाफ जाने से पहले 50 फीसदी जुर्माना भरना होगा। उपभोक्ता को परेशान करने वालों को एक से तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। - डिंपल तनेजा, महिला अधिवक्ता सिरसा। फोटो- 2
उपभोक्ता फोरम में न्याय पाना बहुत ही सरल है, उपभोक्ता खुद ही लिखित में शिकायत उपभोक्ता फोरम में कर सकता है। केंद्र सरकार ने 3 दशक के बाद 20 जुलाई 2020 को उपभोक्ता संरक्षण कानून में कई बदलाव किए हैं। इन में से उपभोक्ता संरक्षण,विवाद निवारण आयोग, मध्यस्थता, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद नियम सहित उपभोक्ता संरक्षण नियम 2020 शामिल हैं। ये नियम पुराने नियम की तुलना में अधिक व्यापक हैं एवं उपभोक्ता केंद्रित हैं। नए कानून में यह प्रावधान है कि अब कहीं से भी उपभोक्ता शिकायत दर्ज कर सकता है। पहले उपभोक्ता वहीं शिकायत दर्ज कर सकता था, जहां से उसने सेवा ली है।- गणेश सेठी, अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन सिरसा। फोटो- 3
दुर्घटना में अपना पैर गंवाने वाले किसान को मिला इंसाफ, बीमा कंपनी को क्लेम के साथ मुआवजा व कानूनी खर्च भी देना पड़ा
दुर्घटना में अपनी एक टांग गंवाने वाला एक किसान को उपभोक्ता न्यायालय से इंसाफ मिला। उपभोक्ता न्यायालय ने बीमा कंपनी को छह प्रतिशत ब्याज सहित 9 लाख रुपये क्लेम राशि देने के आदेश दिया। इसके साथ ही बीमा कंपनी को 25 हजार रुपये मुआवजा और पीड़ित किसान की कानूनी लड़ाई में खर्च हुई राशि के तौर पर 10 हजार रुपये देने के आदेश दिए। गांव धिंगतानियां निवासी बलबीर ने सिरसा इंडसइंड बैंक से 30 फरवरी 2016 को किसान क्रेडिट कार्ड बनाया था। कार्ड बनाने के साथ ही रेलिगेयर हेल्थ कंपनी ने पॉलिसी दी थी। किसान बलबीर ने 9 लाख का हेल्थ बीमा करवाया। इस बीमे में सारे रिस्क कवर थे। 25 फरवरी 2018 को बलबीर धिंगतानियां से रंगड़ी खेड़ा जाते समय एक्सीडेंट हो गया। दुर्घटना में बलबीर बुरी तरह से घायल हो गया और उसकी टांग टूट गई। 26 फरवरी 2018 को चोपटा थाना पुलिस ने बलबीर का बयान दर्ज कर एफआईआर भी दर्ज की। इसके बाद बलबीर ने बीमा कंपनी से क्लेम राशि मांगी, लेकिन कंपनी क्लेम राशि देने में आनाकानी करने लगी। इसके बाद किसान बलबीर ने 29 अक्तूबर 2018 को जिला उपभोक्ता फोरम का द्वार खटखटाते हुए इंसाफ की गुहार लगाई थी।
कौन कर सकते हैं शिकायत
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत ग्राहक, पंजीकृत एसोसिएशन, केंद्र व राज्य सरकार, और उपभोक्ता का कानूनी उत्तराधिकारी शिकायत कर सकता है। इस कानून के तहत विक्रेता, निर्माता, डीलर, सेवा प्रदान करने वाले व्यक्ति के खिलाफ शिकायत की जा सकती है।
अधिकारों के साथ उपभोक्ता के कर्तव्य भी हैं
उपभोक्ता सावधान रहे, शिकायत दर्ज करें। अपने अधिकारों को जाने, पहचाने व उनका प्रयोग करें। बिल, मीमो, इनवॉयस लें, ताकि शिकायत करते समय काम आए। शिक्षित या जागरूक होना चाहिए, कानूरी अधिकारों का प्रयोग करें।
सजा व जुर्माना
सेक्शन 88: केंद्रीय अथॉरिटी के निर्देशों को लागू करने में विफल होने पर छह माह कैद या 20 लाख रुपये जुर्माना या दोनों।
सेक्शन 89: झूठे, भ्रामक विज्ञापन पर दो साल तक की सजा या दस लाख रुपये जुर्माना या दोनों।
इन दोनों सेक्शन के तहत शिकायत सेंट्रल अथॉरिटी द्वारा ही की जा सकती है।
सेक्शन 90: मिलावट पर रोकथाम के लिए बना है। मिलावटी वस्तु खाने से यदि कोई नुकसान ना हो तो छह माह कैद या एक लाख रुपये जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। थोड़ा नुकसान हो तो एक साल की कैद या तीन लाख रुपये जुर्माना या दोनों। ज्यादा नुकसान हो तो सात साल की कैद या पांच लाख रुपये जुर्माना या दोनों। मौत हो जाए तो आजीवन कारावास तक की कैद या कम से कम दस लाख रुपये जुर्माना या दोनों। ज्यादा नुकसान व मौत होने की स्थिति में पुलिस को एफआईआर दर्ज करके आरोपियों को गिरफ्तार करने का भी अधिकार है और यह अपराध गैर जमानती है।
इसके तहत पहली बार सजा होने पर निर्माता व अन्य का दो साल तक लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है और दूसरी बार सजा होने पर लाइसेंस को रद्द भी किया जा सकता है।
सेक्शन 91: नकली वस्तु बेचने पर रोक लगाने के लिए है। यदि नकली वस्तु का प्रयोग करने से नुकसान होता है तो एक साल की कैद या तीन लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों। ज्यादा नुकसान होने पर सात वर्ष कैद या पांच लाख रुपये जुर्माना या दोनों। मृत्यु हो जाने पर सात साल से आजीवन कारावास या कम से कम दस लाख रुपये जुर्माना या दोनों।