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प्रवासी भारतीय दिवस पर विशेष: युवाओं को साहित्य से जोड़ने में जुटे प्रवासी हरदेव विर्क

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प्रवासी भारतीय हरदेव विर्क। संवाद - फोटो : Sirsa
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जगतार समालसर
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ऐलनाबाद। प्रवासी भारतीय समय-समय पर अपने पैतृक गांवों में सामाजिक कार्य करते हुए अपना अहम रोल अदा कर रहे हैं। ये प्रवासी भारतीय अपने पैतृक गांव में खेल टूर्नामेंट करवाकर बच्चों को नशों से दूर रहने के लिए प्रेरित करने व लाइब्रेरी खोलकर साहित्य के साथ जोड़ने के लिए प्रयासरत रहते हैं। ऐसे ही खंड के गांव अमृतसर कलां निवासी प्रवासी भारतीय हरदेव विर्क युवाओं को साहित्य से जोड़ने में जुटे हुए हैं।
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हरदेव विर्क 42 वर्षों से कनाडा के एडमिंटन शहर में रह रहे हैं, लेकिन वे अपने गांव के विकास के लिए आज भी प्रयासरत हैं।
उन्होंने गांव में युवाओं को साहित्य से जोड़ने के लिए एक लाइब्रेरी स्थापित की है। इसमें उन्होंने हर तरह की पुस्तकें उपलब्ध करवाई है। हरदेव विर्क ने बताया कि उन्होंने 1993 में ही अपने क्षेत्र में साहित्य कार्यक्रम करवाने शुरू किए थे। 1997 में उनके पिता जसवंत सिंह राज की मृत्यु हो गई। इसके बाद अब वे हर वर्ष अपने पिता की याद में अपने पैतृक क्षेत्र में साहित्यिक कार्यक्रम करवाते हैं। वह हर वर्ष कनाडा से अपने गांव आते हैं। साहित्यिक कार्यक्रम में पुस्तकों की स्टालें लगाई जाती है। इस बार भी 26 फरवरी को अपने पिता जसवंत सिंह राज की याद में साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित करवाया जा रहा है। इसमें पंजाबी शायर सरजीत पात्र गुरु नानक देव जी के जीवन पर आधारित भाषण देंगे। उनके बेटे मनराज साफ-सुथरी गायकी से मिसाल पेश करेंगे और युवाओं को नशे से दूर रहकर अच्छे साहित्य से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनका यह सफर पूरी उम्र तक जारी रहेगा, ताकि बच्चों को सामाजिक बुराइयों से दूर रखकर अच्छे काम में जोड़ा जा सके।
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