सिरसा। बॉंन्ड पॉलिसी के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने ओपीडी बंद रखकर हड़ताल की। शहर के 100 से ज्यादा निजी अस्पतालों में ओपीडी ठप रही और मरीजों को भटकना पड़ा। केवल इमरजेंसी और पहले से दाखिल मरीजों का इलाज किया गया। ओपीडी में आए 7 हजार से ज्यादा मरीजों को बिना जांच और इलाज के ही वापस लौटना पड़ा।
सोमवार को आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) से जुड़े डॉक्टरों ने बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में शटरडाउन कर ओपीडी में मरीजों की जांच करने की प्रक्रिया बंद रखने का निर्णय लिया। सुबह आठ बजे ही आईएमए से जुड़े डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। हालांकि सुबह नौ बजे के बाद मरीजों की जांच प्रक्रिया शुरू होती है। मरीज अलग-अलग अस्पतालों में जांच करवाने के लिए पहुंचे लेकिन यहां पर तैनात कर्मचारियों ने डॉक्टर के हड़ताल पर होने की जानकारी दी। जिसके बाद भी कई मरीज अन्य अस्पतालों में चक्कर काटते रहे। लेकिन वहां के डॉक्टर भी हड़ताल में शामिल होने के चलते मरीजों को परेशानी होकर बिना जांच करवाए ही वापस लौटना पड़ा। हालांकि बड़े अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाए बहाल रही। यहां पर सड़क हादसों, डिलीवरी व गंभीर मरीजों को दाखिल कर उनको उपचार भी दिया गया।
आईएमए भवन में बैठक कर सरकार के खिलाफ जताया रोष
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े डॉक्टरों ने रानियां रोड पर स्थित आईएमए भवन में बैठक की और सरकार के खिलाफ रोष भी जाहिर किया। आईएमए प्रधान डॉ. आशीष खुराना ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की ओर से बनाई गई बॉन्ड पॉलिसी के कारण सामान्य वर्ग के विद्यार्थी डॉक्टरी की पढ़ाई तक नहीं कर पाएंगे। सरकार ने पढ़ाई करने के लिए विद्यार्थियों को सात साल तक बॉन्ड करने का नियम बनाया है। अगर कोई विद्यार्थी बॉन्ड नहीं करता तो उन्हें एडमिशन से पहले 40 लाख रुपये की राशि अदा करनी होगी। जिन विद्यार्थियों को सरकारी नौकरी नहीं मिलती तो उन्हें अन्य प्राइवेट संस्थान में नौकरी करने के लिए सात वर्ष तक का इंतजार करना होगा। इस तरह की पॉलिसी के कारण सामान्य वर्ग के विद्यार्थी न तो राशि अदा कर सकेंगे और अगर वह बॉन्ड करने के बाद सरकारी सीट पर दाखिला लेकर पढ़ाई करने के बाद बाहर निकलते हैं तो उन्हें सरकारी नौकरी मिलने का इंतजार करना होगा। जोकि विद्यार्थियों के लिए बेहद ही गलत पॉलिसी है। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय कमेटी का जो भी फैसला होगा व उनके साथ चलेंगे और शिक्षण संस्थानों में पहुंचकर विद्यार्थियों को भी इस बॉन्ड पॉलिसी के बारे में जानकारी देंगे ।
हमें पता चला था कि यहां डॉक्टर अच्छे हैं इसलिए यहां जांच करवाने फतेहाबाद से आए थे। लेकिन यहां पर पहुंचने के बाद डॉक्टर के हड़ताल पर होने की जानकारी मिली है। अन्य अस्पताल के डॉक्टर भी हड़ताल पर होने की जानकारी दी गई है। जिसके कारण अब बिना जांच करवाए ही वापस लौटना पड़ रहा है।
-आजाद, मरीज, निवासी फतेहाबाद
त्वचा में बीमारी होने के कारण बाल गिर रहे हैं। जिसकी जांच करवाने के लिए निजी अस्पताल में पहुंचे थे। लेकिन यहां पर ओपीडी बंद होने का पता चला। सरकारी अस्पताल में भी त्वचा रोग विशेषज्ञ न होने की बात कही जा रही है। जिसके कारण अब बिना जांच करवाए ही वापस लौटना पड़ रहा है।
-नवीन कुमार, पीलीमंदोरी
नागरिक अस्पताल की ओपीडी में नहीं दिखा कोई विशेष प्रभाव
निजी अस्पताल के डॉक्टरों की ओर से हड़ताल की जाने के कारण नागरिक अस्पताल की ओपीडी पर भी कोई विशेष प्रभाव देखने को नहीं मिला। हालांकि नागरिक अस्पताल में स्थिति सामान्य देखने को मिली। सरकारी अस्पताल में कई बीमारियों के विशेषज्ञ न होने के कारण यहां पर कम मरीज की ही जांच करवाने के लिए पहुंचते हुए दिखाई दिए।