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बरसात और ओलावृष्टि से हजारों एकड़ फसल नष्ट

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क‌िसान - फोटो : Bureau
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पिछले दो दिनों में हुई बरसात, ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। किसानों की दो फसलें जहां पूर्व में ही बर्बाद हो चुकी थीं, वहीं अब तीसरी बार लगातार भी बरसात, ओलावृष्टि ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। अब किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है। एक बार फिर किसान मुआवजे के लिए लामबंद होंगे। किसानों के कर्ज माफ की मांग भी उठाई है।
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गत दिवस हुई बरसात, ओलावृष्टि से जिले में हजारों एकड़ फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। अभी पिछली फसल के मुआवजे की मरहम लगा नहीं था कि अब ओलावृष्टि से भारी नुकसान होने से किसान बुरी तरह से टूट चुके हैं। गत दिवस रोड़ी क्षेत्र के गांव अलीकां, रंगा, मतड़, लहंगेवाला, झंडा खुर्द, मुसाहिब वाला, भरोखां सहित अनेक गांवों में तेज बरसात व ओलावृष्टि के कारण फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गईं हैं।

सरपंच त्रिलोचन सिंह व उसके भाई गुरप्रीत की करीब 80 एकड़ सरसों, चना, गेहूं व सब्जी की फसल, बलराज सिंह की 16 एकड़, गुरमीत सिंह की 35 एकड़, राजेंद्र की 5 एकड़, नाजर सिंह की 11 एकड़, जैला सिंह की 12 एकड़, रिछपाल की 15 एकड़, भजन सिंह की 10 एकड़, स्वर्ण सिंह साढ़े पांच एकड़ फसल नष्ट हो गई हैं। पाला राम का कहना है कि उसने 19 एकड़ जमीन ठेक पर लेकर गेहूं की फसल की बिजाई की थी, सारी ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई। किसानों का कहना है कि लगातार तीन फसलें खराब होने से उनके सामने अपने परिवार के पालन-पोषण की भी समस्या गहरा गई है।
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इसी प्रकार गांव भरोखां के किसान राजेंद्र भांभू, राजेंद्र बैनीवाल, अनिल, अशोक, सतबीर, मनदीप आदि ने बताया कि भरोखां व आसपास के गांवों में सरसों की फसल को 80 प्रतिशत से अधिक और गेहूं की फसल को 50 प्रतिशत अधिक नुकसान हुआ है। किसानों ने मांग की है कि सरकार इस फसल को कम से कम 25 हजार रुपये मुआवजा दे और किसानों के कर्ज माफ किए जाएं, ताकि किसान अगली फसल की बिजाई कर सकें और उन्हें आर्थिक मदद मिल सके।  
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