जब से गेहूं की फसल की बिजाई की है तब से घर में एक रात भी सो नहीं सका हूं। सारी रात अपनी फसल को सांडों से बचाने के लिए पहरा देना पड़ता है। इसके बारे में शासन और प्रशासन ने कुछ नहीं किया तो फसलें ये लावारिस सांड ही चट कर जाएंगे।
यह बात अपनी पीड़ा को व्यक्त करते हुए गांव झंडा के किसान बंशीलाल ने कही। यह पीड़ा केवल बंशी लाल की नहीं है अपितु सभी किसानों की है। गांवों में लावारिस सांडों से किसान आज सबसे अधिक परेशान हैं।
इस समस्या के बारे में न तो प्रशासन को कोई चिंता है और न ही शासन को। कथित गोभक्त भी किसानों के लिए सिरदर्दी बढ़ा रहे हैं क्योंकि किसानों को इन सांडों को दूसरे स्थानों तक ले जाते वक्त ये कथित गोभक्त उन्हें गो तस्कर बता कर मामला दर्ज करवा देते हैं।
जिले में एक भी ऐसा गांव नहीं है जहां पर सैकड़ों की संख्या में लावारिस सांड न हों। रात को झुंड में खेतों में जाकर ये फसलों को तबाह कर देते हैं।
किसानों की खून-पसीने की कमाई को सरेआम लावारिस सांड चट कर रहे हैं और इस गंभीर समस्या पर शासन-प्रशासन का कोई ध्यान नहीं हैं।
पिछले पांच सालों से प्रशासन नंदीशाला बनाने के लिए आश्वासन दे रहा है पर अब तक जगह भी निर्धारित नहीं हो सकी है।
गांव भरोखां के किसान कृष्ण भांभू ने बताया कि ग्रामीण एक-दूसरे के गांवों में इन आवारा सांडों को छोड़ जाते हैं। यह सिलसिला वर्षों से जारी है। उन्होंने बताया कि लोग रातों को खेतों में पहरा दे रहे हैं ताकि उनके खेतों में सांड न घुस जाए।
फिर भी किसी न किसी किसान के खेत में ये सांड धावा बोल देते हैं। गांव रंगड़ी के किसान विक्रम सिंह ने बताया कि किसानों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या लावारिस सांडों की है।
सरकार को इस क्षेत्र में कुछ कदम उठाने चाहिए। गांव बनसुधार के किसान सन्नी खिचड़ ने बताया कि देश के खाद्यान भंडार भरने के लिए किसान मेहनत करता है पर ये आवारा सांड उनकी मेहनत पर पानी फेर रहे हैं।
गांव सिकंदरपुर के किसान दिलबाग सिंह ने बताया कि एक दिन कोई किसान रात को अपने खेतों का पहरा न दे तो उसके खेत को सुबह तक आवारा सांड चट कर जाते हैं।
गांव फूलकां के किसान सत्यनारायण ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि इन आवारा सांडों को पकड़ कर किसी दूसरे स्थान पर छोड़े।
किसानों की समस्या का ध्यान नहीं दे रही सरकार जिससे प्रदेश भर के किसानों में सरकार के प्रति आक्रोष है। गांव नेजाडेला कलां के किसान होशियार सिंह ने बताया कि आवारा सांड खेतों में बहुत नुकसान कर रहे हैं और इनमें से काफी सांड तो आदमियों को भी मारने दौड़ते हैं। इसके अलावा पालतु पशुओं को भी मारते हैं। इनका जरूर कोई समाधान होना चाहिए।
40 मौतों के बाद भी नहीं चेता प्रशासन
सिरसा। गांवों में ही नहीं बल्कि शहर में भी लावारिस सांड यमदूत बनकर घूम रहे हैं। अब तक सांडों द्वारा किए गए हमलों में जिले में गत वर्ष 40 लोग अपनी जान गवां बैठे हैं। अकेले सिरसा शहर में यह आंकड़ा 22 से अधिक है। समस्या की गंभीरता को देखते हुए नगर परिषद द्वारा कई बार सांडों को पकड़ने का अभियान चलाया गया पर समस्या जस की तस बनी हुई है।
नगर परिषद की ओर से पशु पकड़ो अभियान पर लाखों रुपये खर्च करने ने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा। वहीं अगर लावारिस सांडों से शहर में हुई मौत के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो यह संख्या 22 के भी पार जाती है। इसमें से दो पुलिस कर्मचारी भी शामिल है। नगर परिषद ने अपने अभियान में अब तक 481 लावारिस पशु पकड़े हैं जिसमे से अकेले 431 सांड हैं।
किसान शहर में छोड़ जाते हैं सांडों को
गोशाला संघ के जिला कार्यकारी अध्यक्ष रमेश मेहता का कहना है कि रोजाना 50 से 100 संख्या में पशुओं के झुंड को सिरसा की ओर खदेड़ दिया जाता है। यही आवारा पशु सिरसा के गांवों में घुसकर किसानों की फसलों को खराब करते हैं जिससे तंग होकर ग्रामीण इन पशुओं को शहर की ओर से छोड़ देते हैं। इसलिए लावारिस पशुओं की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही।
प्रशासन ने भी टेके घुटने
आवारा पशुओं की समस्या के समाधान में जुटे प्रशासन अब तक सफल नहीं हो पाया है। पांच वर्ष पूर्व जिला प्रशासन ने बड़ागुढा स्थित अनाज मंडी में आवारा पशुओं को छोड़ने का मन बनाया था लेकिन प्रशासन का यह कदम सफल नहीं हुआ। इसके बाद सभी गोशालाओं में बांट कर सांड भेजने का फैसला लिया गया पर गोशाला समितियों द्वारा हाथ खड़े कर दिए गए।
बाद में प्रशासन ने अलग से नंदीशाला खोलने का विचार किया पर अब तक प्रशासन को नंदीशाला के लिए जगह ही नहीं मिली है। इस मसले को लेकर कई बार उपायुक्त ने अधिकारियों की बैठक ली है पर कोई समाधान नहीं निकला। गोशालाओं में भी सांडों को नहीं रखा जाता क्योंकि ये सांड गायों को मारते हैं।
बार-बार चलाते हैं अभियान
नगर परिषद द्वारा आवारा सांडों को बार-बार अभियान चलाया जाता है। अब तक 481 लावारिस पशु पकड़ चुकी है जिसमें से 431 अकेले सांड हैं। अब गोशालाओं ने लावारिस पशुओं को लेने से मना कर दिया है जिससे यह अभियान बंद कर दिया गया है।
देवेंद्र बिश्नोई, सीएसआई, नगर परिषद, सिरसा
लघु सचिवालय में छोड़ेंगे सांड : भारूखेड़ा
मुआवजे की लड़ाई के बाद किसान मंच आवारा सांडों की समस्याओं को लेकर लड़ाई शुरू करेगा। किसानों की इस समस्या को लेकर अनेक बाद शासन और प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं पर अब तक किसानों की इस समस्या को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया। सभी गांवों में जाकर किसानों को जागरूक किया जाएगा और एक दिन ही सभी गांवों से किसान आवारा सांडों को लेकर चलेंगे और लघु सचिवालय में छोड़ेंगे। इसके बाद शहर के चारों और किसान पहरा देंगे ताकि फिर से गांवों में इन सांडों को न छोड़ दिया जाए।
-प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा, प्रदेशाध्यक्ष हरियाणा किसान मंच
कथित गोभक्त नहीं पालते गोवंश
किसानों का कहना है कि कथित गोभक्त एक गोवंश भी नहीं पालते। गोवंश के लिए बड़ी-बड़ी बातें करने वालों को अपने घरों में गोवंश पालने चाहिए। किसानों का आरोप है कि कुछ कथित गोभक्त तो रात को सड़कों पर पहरा लगाते हैं और गोवंश को इधर-उधर ले जाने वाले किसानों के साथ मारपीट तक करते हैं और प्रशासन भी उन्हीं की मदद करता है। किसानों की मांग है कि मेले शुरू किए जाएं ताकि बैलों की खरीद शुरू हो और किसान अपने खेतों में काम करने के लिए इन्हें ले जा सकें।