चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय का मुख्यद्वार।
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में पिछले पांच वर्ष के दौरान पदोन्नति पा चुके कर्मचारियों के लिए नया संकट खड़ा हो गया है। इन पर अब पदावनति (डिमोशन) की तलवार लटक रही है। इस संबंध में सीडीएलयू ने एक कमेटी का गठन कर दिया है। उक्त कमेटी सदस्य विभिन्न पक्षों पर मंथन कर रहे हैं। जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। आशंका है कि उन कर्मचारियों की पदोन्नति भी रद्द हो सकती है, जिन्हें वर्ष 2017 के नए प्रमोशन चैनल अनुसार पदोन्नत किया गया था।
सीडीएलयू में पिछले पांच वर्ष के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों की पदोन्नतियां हुई हैं। जिन कर्मचारियों की पदोन्नति वर्ष 2017 में बने नए प्रमोशन चैनल को आधार बनाकर की गई हैं, उनकी पदोन्नति रद्द हो सकती है। इस संबंध में सीडीएलयू प्रशासन ने काम शुरू कर दिया है। कमेटी में शामिल अधिकारी जल्द ही बैठक करेंगे। इस दौरान चर्चा की जाएगी कि हाईकोर्ट के आदेश लागू होने के बाद क्या-क्या बदलाव होने चाहिए। इसके अलावा लीगल ओपीनियन भी लिया जाएगा कि कानून क्या कहता है। सीडीएलयू की नियमावली की क्या परिभाषा है, इस पर भी फैसला लिया जाएगा। संवाद
ये है मामला
सीडीएलयू में कर्मचारियों के दो चैनल हैं। एक तकनीकी कर्मचारियों का चैनल, जबकि दूसरा सामान्य कर्मचारियों का। चैनल अनुसार ही भर्ती होती है और फिर पदोन्नति भी। नियम है कि एक चैनल से कर्मचारी दूसरे चैनल में नहीं जा सकता। सीडीएलयू में कुछ कर्मचारी ऐसे थे जिनकी पदोन्नति के रास्ते एक समय बाद बंद हो जाते हैं। ऐसे में वर्ष 2017 में तत्कालीन वीसी प्रो. विजय कार्यरत के कार्यकाल में नया प्रमोशन चैनल बनाने का फैसला हुआ। इसके तहत एक कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी ने दोनों चैनल में बदलाव किया और जिन कर्मचारियों के पदोन्नति के रास्ते बंद थे, उन्हें दूसरे चैनल में जाने का प्रावधान कर दिया। इससे कई कर्मचारियों के पदोन्नति के रास्ते खुल गए। तत्कालीन वीसी ने तर्क दिया कि कर्मचारियों के लिए तरक्की के रास्ते खोले हैं। इसलिए ऐसा किया गया है। इसी दौरान एक कर्मचारी प्रभावित हुई। उनकी पदोन्नति के रास्ते खुलने के बजाय बंद हो गए। उक्त कर्मचारी ने निर्धारित माध्यम से सीडीएलयू प्रशासन को अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ये प्रमोशन चैनल तरक्की के लिए बनाया गया है जबकि उन्हें नुकसान हो गया। सीडीएलयू प्रशासन ने शिकायत नहीं सुनी तो उक्त कर्मचारी ने न्यायालय में इस फैसले को चैलेंज किया। 23 मार्च को उच्च न्यायालय ने वर्ष 2017 में बने प्रमोशन चैनल को ही रद्द करने के आदेश जारी कर दिए।
रजिस्ट्रार बोले
हाईकोर्ट का फैसला आया था। इसे लागू करने के लिए कमेटी का गठन किया गया है। इससे संबंधित जो भी बदलाव होंगे, उन पर मंथन पर कमेटी के सदस्य करेंगे।
-डॉ. राजेश बांसल, रजिस्ट्रार, सीडीएलयू, सिरसा।