सिरसा। नया शिक्षा सत्र शुरू होने वाला है। लेकिन इससे पहले ही पुस्तकों के रेट दोगुणा हो गए हैं। दूसरी कक्षा की पुस्तकों का जो सेट पिछले वर्ष 5 हजार रुपये में मिलता था, वह अब 11 हजार रुपये में मिलेगा। ऐसे में नई पुस्तकों की डिमांड ठप हो गई है। पुस्तक विक्रेताओं से अभिभावक पुरानी पुस्तकें मांग रहे हैं। ऐसे में पुस्तक विक्रेताओं के साथ-साथ अभिभावक भी परेशान हैं।
पहले जो पुस्तक 500 रुपये में आती थी। अब उसका मूल्य 1000 रुपये हो गया है। पुस्तकों के रेटों से अभिभावक परेशान है। जिसके कारण बुक डिपो पर पुरानी पुस्तकों की मांग बढ़ गई है। इस साल अभिभावकों पर बच्चों की पढ़ाई का बोझ दो गुणा हो गया है। क्योंकि इस बार पुस्तकें महंगी हो गई हैं। किताबों की दुकानों पर पुरानी किताबें खरीदने वाले लोगों की भीड़ लगी रहती है। इस समय प्राइवेट पब्लिशर ने किताबों के मूल्य में पिछले साल की तुलना में 100 फीसदी की बढ़ोतरी की है। वहीं एनसीआरटी की पुस्तकों को महंगा नहीं किया गया। सिर्फ किताबें ही नहीं नोट बुक, रिम भी महंगे हो गए हैं। पिछले साल जो रिम 160 रुपये का मिलता था। वही रिम इस साल 270 रुपये का मिल रहा है। वहीं जो नोट बुक पिछले साल 50 रुपये में मिल रही थी। वही नोट बुक इस साल 70 रुपये में मिल रही है। पिछले साल दूसरी कक्षा की किताबें करीब 4 से 5 हजार रुपये के बीच आती थी। वहीं इस समय ये किताबें 10 से 11 हजार रुपये के बीच आ रही हैं।
पुरानी किताबों की डिमांड बढ़ी, कोटा से आ रही किताबें
बाजार में पुरानी किताबों की डिमांड बढ़ गई है। इस समय अभिभावकों में अपने बच्चों के लिए पुरानी किताबें खरीदने की होड़ लगी हुई है। बाजारों से नई किताबों की मांग घटी है। कोई भी अभिभावक इस समय नई किताबें नहीं खरीद रहा है। बुक डिपो होल्डर्स का कहना है कि इस समय मार्केट में सबसे ज्यादा पुरानी ही किताबों की मांग है। जिसके कारण दिल्ली व 800 किलोमीटर दूर कोटा से पुरानी किताबों को मंगवा रहे हैं। कोटा बुक होल्डर्स के पास पर्याप्त मात्रा से पुरानी किताबें मौजूद हैं। वहीं नई पुस्तकों को बुक होल्डर मंगवा ही नहीं रहे हैं। क्योंकि रेट बढ़ने से कोई भी अभिभावक नई पुस्तकों को नहीं खरीद रहा है।
मार्केट से नई किताबों की डिमांड बिल्कुल ही घट गई है। क्योंकि इस समय पुरानी की मांग ज्यादा बढ़ गई है। क्योंकि पुरानी किताबों की मूल्य में कोई फर्क नहीं आया है। पुरानी किताबों पर जो पहले एमआरपी है उसी के आधे दाम में पुरानी किताबें इस समय दी जा रही है। जिसके कारण लोग पुरानी किताबें लेना पसंद कर रहे है।
- संजय मेहता, संजय बुक डिपो ।
मैं अपने बच्चे के लिए हर साल नई किताबें लेता हूं। लेकिन इस बार महंगाई ने रिकॉर्ड तोड़ दिए है। जो किताबें पिछले साल 400 में मिल रही थी। वहीं इस समय 800 में मिल रही है। किताबों के मूल्य में दोगुणा बढ़ोतरी हुई है। जिसके कारण पुरानी किताबों को खरीदने के सिवा कोई चारा नहीं है।
- कुलवंत सिंह, अभिभावक।
मैं अपने बच्चे के लिए 10वीं की किताबें ले रही हूं। मैं भी पुरानी किताबें ले रही हूं। क्योंकि नई किताबें बहुत ज्यादा महंगी हैं इस समय। वहीं स्कूलों द्वारा हर साल किताबों को बदल दिया जाता है। जिसके कारण हर साल अभिभावकों पर एक अनावश्यक बोझ आ जाता है।
जगपाल कौर, अभिभावक।
मेरी बेटी इस समय नौंवी कक्षा में है। मैं पुरानी किताबें लेनी आई हूं। नई किताबें इस समय बहुत ज्यादा महंगी हैं। सरकार को चाहिए कि किताबों को सस्ता करें। बच्चों को शिक्षा के लिए किताबों की जरूरत होती है। अगर ये इतनी महंगी हो जाएंगी तो मध्यम परिवार बच्चों को पढ़ाएगा कैसे। - कवलजीत कौर, अभिभावक।