संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जोधकां गांव की सविता पूनिया आज किसी शोहरत की मोहताज नहीं है। वे हॉकी में देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमका रही हैं। सविता पूनिया भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान भी हर चुकी हैं। इनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने कांस्य पदक भी हासिल किया था। इनकी सफलता में सबसे बड़ा हाथ उनके पिता महेंद्र पूनिया का रहा है। जब लोग बेटियों को खेलकूद के क्षेत्र में भेजने से साफ मना कर देते थे, तब उन्होंने सविता के हाथ में हॉकी की स्टिक थमाई, तब से सविता भी सफलता के गोल दागतीं आ रही हैं।
फादर्स डे के विशेष मौके पर खिलाड़ी सविता पूनिया ने अपनी सफलता में अपने पिता महेंद्र पूनिया के संघर्ष की कहानी बयां की। उन्होंने कहा कि हॉकी खेल से जो सम्मान मिला है, उसे वे लफ्जों में बयान नहीं कर सकती। मैंने मेहनत की और मेरे पिता महेंद्र पूनिया ने पूरा साथ दिया। मेरे पिता हर समय मुझे हौंसला देते थे ताकि मैं अपने खेल पर फोकस कर सकूं। कई बार लोग मेरे पिता को कहते थे कि लड़की है, कैसे खेलेगी, लेकिन उस समय मेरे पिता ने मुझे हॉकी स्टिक थमाई। वे हमेशा एक ही बात कहते हैं कि लोगों के बोलने से नर्वस होने के बजाय अपना लक्ष्य निर्धारित करो और उनको दिखा दो कि तुम क्या कर सकती हो। उन्होंने बताया कि मैंने छठी कक्षा में हॉकी स्टिक को पकड़ा था। उस समय हॉकी स्टिक मेरे कंधे तक आती थी। 2004 में सिरसा के महाराजा अग्रसेन स्कूल में कोचिंग शुरू की।
स्कूल में खेल गतिविधियों में सविता पूनिया की फुर्ती देखकर अध्यापक दीपचंद ने उनके पिता महेंद्र पूनिया से हॉकी नर्सरी में नाम दर्ज करवाने की बात कही थी।
भारतीय महिला हॉकी टीम में गोल कीपर हैं सविता पूनिया
सविता पूनिया भारतीय महिला हॉकी टीम में गोल कीपर के तौर पर खेलती हैं। सन् 2008 में जर्मनी में हॉकी टूर्नामेंट के बाद हॉकी स्टिक को सविता ने कभी अपने से दूर नहीं होने दिया। सबसे पहले 2016 में ओलंपिक खेला और अब 2021 में टोक्यो ओलंपिक में भाग लिया। हाल ही में ओमान में हुई कॉमनवेल्थ गेम्स में सविता पूनिया की कप्तानी में महिला हॉकी टीम ने कांस्य पदक हासिल किया था।
बेटियां कभी भी बेटों से कम नहीं होती। यह सोच लेकर जब हम अपनी बेटियों को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे तो वह कामयाब होकर ही रहेंगे। कई बार इस मामले में मुझे भी कहा गया था कि बेटी है, खेलों में क्या करेगी, लेकिन मैं उनकी बात को अनसुना करता रहा। मैं सरकारी जॉब में था और फार्मासिस्ट पद से रिटायर हुआ हूं। सविता ने जब-जब मुझसे जो भी इच्छा जाहिर की, मैंने उसे पूरा किया है। माता-पिता का फर्ज है कि वह बच्चों को आगे बढ़ाए और उनके लिए टारगेट भी फिक्स करे। - महेंद्र पुनिया, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी सविता पूनिया के पिता।